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प्रत्येक क्षेत्र में शीर्ष पर रहे महामना

Tue, 26 Dec 2017 01:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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भारतरत्न महामना पंडित मदनमोहन मालवीय का उनकी 156वीं जयंती पर सोमवार को भावपूर्ण स्मरण किया गया। अनेक संस्थाओं की ओर से हुए विविध कार्यक्रमों में महामना को याद करते हुए शिक्षा, न्याय, समाजसेवा, राजनीति सहित विभिन्न क्षेत्रों में उनके महती योगदान को रेखांकित किया गया। सदस्यों ने यह भी कहा कि महामना के आदर्शों को आत्मसात करके नए भारत का निर्माण किया जा सकता है।
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सेवा समिति विद्या मंदिर इंटर कालेज में  दी सेवा समिति की ओर से हुए समारोह में बतौर अध्यक्ष काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर गिरीश चंद्र त्रिपाठी ने कहा, महामना ने जीवन के जिस क्षेत्र को स्पर्श किया, वह उसके शीर्ष तक पहुंचे। उन्होंने जीवन में जो कुछ सोचा उसे पूरा किया, इसीलिए वह महामना कहलाए। वह महान समाजसुधारक और शिक्षाविद् के साथ ही पत्रकारिता को यशस्वी बनाने वालों में से थे। उनका मानना था कि शिक्षा और ज्ञान की दृष्टि से स्वंतत्र राष्ट्र ही अधिक समय तक संप्रभु और स्वतंत्र रह सकता है। कहते थे, शिक्षाविद् नहीं चरित्रवान लोग चाहिए। यही राष्ट्र का निर्माण करेंगे। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय राष्ट्र का संकल्प था। अंत में उन्होंने घोषणा की कि महामना के कृतित्व पर विचार संगोष्ठी की शृंखला शुरू की जाएगी।

मुख्य अतिथि सांसद श्यामाचरण गुप्त ने महामना आजीवन पीड़ितों, शोषितों को न्याय दिलाने में लगे रहे। मौजूदा शिक्षा और न्याय व्यवस्था पर चिंता व्यक्त की। कहा, इसकी कमियों को दूर किया जाना चाहिए। भिक्षाटन से विश्वविद्यालय का निर्माण करके उन्होंने मिसाल कायम की। महामना के आदर्शों के अनुरूप विधि विश्वविद्यालय बनाए जाने की जरूरत है। इसके साथ ही उन्होंने इसके लिए एक करोड़ रुपये की सहयोग राशि देने का भरोसा दिलाया।
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विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार डॉ.योगेश मिश्र ने महामना के व्यक्तित्व और कृतित्व के अनेक अनछुए पहलुओं को रेखांकित किया। कहा, उन्हें हिन्दुत्व के प्रति आस्था की प्रेरणा चौक चर्च के पादरी से मिली थी। हिन्दी को राष्ट्रभाषा और निचली अदालतों की भाषा बनाने में उनका योगदान अप्रतिम है। गांधी जी ने महामना के वैचारिक स्तर पर महामना को गंगाजल की संज्ञा दी थी, जिसमे कोई भी डुबकी लगाकर धन्य हो सकता है। महामना के कीर्ति स्तंभों को अक्षय बनाए रखने की जरूरत है। समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रामनरेश तिवारी पिंडीवासा, संतोष जैन देश के लिए महामना के विचार आज और ज्यादा प्रासंगिक हो गए हैं।

माध्यमिक शिक्षा परिषद के पूर्व क्षेत्रीय सचिव डॉ.रामाज्ञा राय ने कहा, वह आजीवन पीड़ितजनोंकी सेवा करते रहे। वरिष्ठ पत्रकार शक्तिकुमार पांडेय ने कहा, महामना ने हिन्दुत्व के उदात्त पक्ष को समझा था,जिसमें सभी का विकास निहित है।प्रधानाचार्य ब्रजेश कुमार शर्मा ने अंगवस्त्रम देकर अतिथियों का अभिनंदन, विजय वैश्य ने स्वागत, फूलचंद्र दुबे ने संचालन और विद्यालय कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष अजय शुक्ल ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया।

आद्य ज्योतिष अनुसंधान संवाहक सोसाइटी की ओर से हुए जयंती समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शंकराचार्य वैदिक शोध संस्थान के स्वामी ज्ञानानंद सरस्वती ने महामना को मानवता का पुजारी बताया। विशिष्ट अतिथि प्रोफेसर ओमप्रकाश मालवीय ने महामना को आधुनिक भारत के निर्माता की संज्ञा दी। प्रोफेसर हरिदत्त शर्मा ने कहा, महामना स्वयं से एक  संस्था थे। डॉ.यज्ञदत्त शर्मा ने कहा, महामना कुशल वक्ता, श्रेष्ठ अधिवक्ता थे।

आरंभ में नूपुर श्रीवास्तव सहित अन्य छात्राओं ने सांगीतिक प्रस्तुतियों से मंत्रमुग्ध किया। मीरापुर बरगद घाट मंदिर परिसर में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ.रामनरेश त्रिपाठी, संयोजन आदित्य कीर्ति त्रिपाठी और संचालन डॉ.हरिश्चंद्र मालवीय ने किया। कार्यक्रम में दिवाकर मालवीय, डॉ.शशिप्रभा, अजय शुक्ल, कृष्ण कुमार मालवीय, प्रभाशंकर मालवीय, अखिलेश आदि मौजूद थे।

भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हिन्दू हास्टल चौराहे पर स्थित महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। विभवनाथ भारती, संतोष त्रिपाठी, कमलाशंकर तिवारी, शशिकांत पांडेय आदि ने उन्हें उद्भव विद्वान, मनीषी, कानूनविद् और निपुण पत्रकार बताया। वहीं उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता किशोर वार्ष्णेय, एसएस मालवीय, डॉ.रमेश जायसवाल, अजय मिश्र, केशव लाल, परवेज सिद्दीकी आदि ने उनके बताए रास्ते पर चलने का आह्वान किया।

 हिंदू छात्रावास के संस्थापक महामना मदन मोहन मालवीय की जयंती मंगलवार को हॉस्टल में धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम में शामिल अतिथियों एवं छात्रों ने पहले महामना की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित किए और इसके बाद संगोष्ठी के माध्यम से उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा की। साथ ही स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका को अहम बताया।

मुख्य अतिथि एमएलसी डॉ. यज्ञदत्त शर्मा ने कहा कि भारती भवन पुस्तकालय में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हस्तलिखित पत्र में गांधी जी ने स्वयं स्वीकारा है कि मदन मोहन मालवीय स्वतंत्रता आंदोलन के सशक्त हस्ताक्षर थे। बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि मालवीय जी के विचारों में हथकरघा एवं लघु कुटीर उद्योग से लोगों में स्वदेशीपन की भावना विकास हुआ। ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के प्राचार्य  डॉ. आनंद शंकर सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन करे लेकर मालवीय जी के विचार लोगों में राष्ट्र के प्रति सचेतना एवं कर्तव्य बोध कराते हैं। प्रो. एचएस उपाध्याय ने कहा कि मदन मोहन मालवीय का दृष्टिकोण राष्ट्रीयता के प्रति अगाध प्रेम है। संगोष्ठी का संयोजन एवं संचालन अमरेंदू सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन अनिल श्रीवास्तव ने किया। इस मौके पर अजय जायसवाल, सत्येंद्र सिंह, सुनील सिंह, सुशील भागवत, पद्मपाणि दीक्षित, विजेंद्र सिंह, राजबहादुर, आदित्य सिंह, आशीष सिंह, अनुभव उपाध्याय, राहुल चौरसिया, पंकज गुप्ता, रिषभ द्विवेदी, सत्यम सिंह, शितांषु आदि मौजूद रहे।
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