इस जानकारी के बाद कोर्ट ने सरकार और अधिकारियों की पीठ थपथपाई। कहा कि लंबे समय से लंबित परियोजना और कार्यदायी संस्था की सुस्ती के बाद जिस तरह मुख्य सचिव ने देखभाल की कमान खुद संभाली, वह काबिले तारीफ है। प्रयागराज की चिकित्सा सुविधाओं को लेकर उठाया गया सरकार का यह पहला ठोस कदम है। जो सरकार और अधिकारियों की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
कोर्ट ने चिकित्सा स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा और वर्तमान सचिव अमित कुमार घोष के प्रयासों की सराहना की। कहा कि महज 10 महीने के संक्षिप्त कार्यकाल के भीतर प्रशासनिक इच्छाशक्ति के दम पर शहर के बीच इतनी बड़ी जमीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए आरक्षित की जा सकी है। 29 मई को सुनवाई होगी। इस दिन अदालत पट्टा विलेख के निष्पादन और अन्य निर्माण का कार्य की प्रगति पर समीक्षा करेगी।