भगवान राम और माता सीता
- फोटो : social media
अयोध्या की तर्ज पर प्रयाराज में आध्यात्मिक पर्यटन के लिए देश , दुनिया के सनातनधर्मियों को लुभाने के लिए राम वन गमन मार्ग के तीर्थों को चिह्नित किया जा रहा है। जिस रास्ते भगवान राम अपने भाई लक्ष्मण और मां सीता के साथ 14 वर्ष के वनवास की यात्रा पर निकले थे, उसके किनारे के शहरों, कस्बों के तीर्थ स्थलों को संवारा जाएगा। अयोध्या की सीमा से शृंगवेरपुर से होते हुए प्रयागराज के बीच दो दर्जन से अधिक तीर्थ स्थल पर्यटन के लिहाज से विकसित किए जाएंगे। संत तुलसी दास के रामचरित मानस के अलावा अन्य धर्मग्रंथों में वन गमन के दौरान भगवान राम के पड़ावों को चिह्नित किया जा रहा है। वन गमन के दौरान प्रभु श्रीराम शृंगवेरपुर में शृंगी ऋषि के आश्रम में ठहरे थे।
भगवान राम और माता सीता
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मान्यता के अनुसार इसी आश्रम में कभी पुत्र प्राप्ति के लिए राजा दशरथ ने शृंगी ऋषि के आचार्यत्व में ही पुत्रेष्ठि यज्ञ किया था। वन गमन के पहले पड़ाव रामचौरा के बाद शृंगवेरपुर और कुरई में स्थित मंदिर में भी भगवान राम, लक्ष्मण और सीता के विश्राम करने का उल्लेख मिलता है। इसके बाद कुरई से आगे प्रभु राम प्रयागराज में भरद्वाज मुनि के आश्रम और फिर संगम पहुंचे थे। ऐसे में प्रयागराज में स्थित भरद्वाज आश्रम के अलावा दुर्वासा आश्रम, वाल्मीकि आश्रम, पराशर आश्रमों को भी धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से संवारा जाएगा। इसके लिए शासन की ओर से प्रस्ताव मांगे गए हैं।
राम वन गमन मार्ग के तीर्थों और परिक्रमाओं को संवारने के लिए प्रस्ताव मांगे गए हैं। धार्मिक पर्यटन और तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए ऐसे तीर्थों को विकसित करने की योजना है। अपराजिता सिंह, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी।