कई योजनाएं तथा सरकारी विभागों में सैकड़ों पद एक झटके में खाली होने जा रहे हैं। सरकार ने अनुपयोगी एवं अप्रासंगिक योजनाएं तथा पदों को खत्म करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री के इस निर्देश पर कार्रवाई शुरू हो गई है। मुख्य सचिव की ओर से पत्र लिखकर सभी विभागों से ऐसे पदों का विवरण मांगा गया है। योजनाओं के बारे में 20 जनवरी तक तथा पदों का विवरण 30 दिन में मांगा गया है। इस पर निर्णय के लिए दो अलग-अलग समितियां भी बना दी गई हैं। जानकाराें का कहना है कि अकेले इलाहाबाद में एक दर्जन विभागों, खासतौर पर निगमों पर इसका असर पड़ेगा और इस फैसले से 100 से अधिक पद खत्म हो जाएंगे।
प्रदेश में हर साल बजट से पहले मितव्ययिता और अनुपयोगी व अप्रासंगिक योजनाओं तथा पदों को खत्म करने के दिशा-निर्देश विभागों के अफसरों को दिए जाते रहे हैं, लेकिन इन निर्देशों को शायद ही कभी तवज्जो मिली होगी। अब योगी सरकार ने इस काम को अपनी शीर्ष प्राथमिकता में शामिल कर लिया है।
मुख्य सचिव राजीव कुमार की ओर से इस आशय का पत्र अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिवों को भेजा गया है।
इसमें विभागवार अप्रासंगिक योजनाओं और पदों का विवरण मांगा गया है। मुख्य सचिव ने दो-दो अलग कमेटियां गठित कर दी हैं। अपर मुख्य सचिव कार्यक्रम क्रियान्वयन संजीव सरन की अध्यक्षता वाली समिति को सभी विभागों से विचार-विमर्श कर अप्रासंगिक योजनाओं को समाप्त करने के संबंध में 20 जनवरी तक संस्तुतियां देने को कहा गया है।
इसके साथ ही मुख्य सचिव ने सभी विभागों को एक महीने के अंदर अपने-अपने विभाग में अनुपयोगी पदों को चिह्नांकित करने का निर्देश दिया है।
इसके बाद अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक की अध्यक्षता वाली समिति संबंधित विभागों के अनुपयोगी पदों को समाप्त करने के विभागीय प्रस्ताव पर विचार-विमर्श कर आगे की कार्यवाही करेगी।
हालांकि, स्थानीय अफसर इस बारे में कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, लेकिन मुख्य सचिव के पत्र से विभागों में हड़कंप मच गया है। कई विभाग ऐसे हैं, जहां कोई काम नहीं है। इन विभाग के अफसरों और कर्मचारियों में अधिक चिंता है। उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष नरसिंह का कहना है कि अप्रासंगिक विभाग और पद खत्म होने चाहिए, लेकिन इस फैसला को लागू करने से पहले सरकार को कर्मचारियों का हित भी देखना चाहिए। पद के सापेक्ष नियुक्त कर्मचारियों का दूसरे विभागों में समायोजन किया जाना चाहिए।