इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज (शुआट्स) के प्रोफेसरों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने विवि में वित्तीय अनुमोदन विवाद के कारण रुके वेतन के मामले में प्रदेश सरकार को तय समय में जांच पूरी करने का निर्देश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज (शुआट्स) के प्रोफेसरों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने विवि में वित्तीय अनुमोदन विवाद के कारण रुके वेतन के मामले में प्रदेश सरकार को तय समय में जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने प्रोफेसर (डॉ.) विक्रम सिंह और अन्य 10 शिक्षकों की याचिका निस्तारित करते हुए कहा कि यदि तय समय में जांच रिपोर्ट नहीं सौंपी जाती तो वेतन रोकने का आदेश स्वतः निरस्त माना जाएगा। मामला विश्वविद्यालय के उन 10 प्रोफेसरों से जुड़ा है, जिनका वेतन और विश्वविद्यालय को मिलने वाला अनुदान राज्य सरकार ने 22 सितंबर 2025 को रोक दिया था।
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याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी नियुक्ति पर कोई ठोस निष्कर्ष निकाले बिना ही वेतन रोकना अवैध है। इससे पूरे संस्थान की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अशोक मेहता ने बताया कि सरकार ने 27 अक्तूबर 2025 को चार सदस्यीय समिति गठित कर दी है, जो एक माह में जांच रिपोर्ट देगी। वहीं, विवि की ओर से अधिवक्ता अमित नेगी ने कहा कि सभी आवश्यक दस्तावेज सरकार को उपलब्ध करा दिए गए हैं। जांच में तेजी लाने के लिए तीन दिन के भीतर दस्तावेज पुनः सौंपे जाएंगे। कोर्ट ने निर्देश दिया कि विवि तीन दिन में वित्तीय अनुमोदन से संबंधित दस्तावेज सरकार को उपलब्ध कराए। इसके बाद जांच समिति 15 दिन में रिपोर्ट दे और सरकार अगले 15 दिन में निर्णय ले। यदि यह प्रक्रिया तय समय में पूरी नहीं होती तो वेतन रोकने और अनुदान बंद करने का आदेश अपने आप समाप्त माना जाएगा।