Government should decide on the integration of Waqf Boards
प्रयागराज। सूबे में वक्फ संपत्तियों के विवादों के निस्तारण हेतु गठित दो वक्फ बोर्डों को समाप्त कर एक बोर्ड बनाने की मांग को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को विचार कर निर्णय लेने के लिए कहा है। मुसर्रत हुसैन की याचिका पर सुनवाई कर रही लखनऊ खंडपीठ के जस्टिस पंकज कुमार जायसवाल और जस्टिस आलोक माथुर की पीठ ने कहा है कि सरकार याची के प्रत्यावेदन पर वक्फ एक्ट 1995 के प्रावधानों के आलोक में विचार कर निर्णय ले।
याची का कहना है कि वक्फ बोर्ड एक्ट 1995 की धारा 13(2) के तहत प्रदेश सरकार को अधिकार है कि वह शिया और सुन्नी समुदाय के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड स्थापित करे, बशर्तें कि शिया वक्फ की संपत्तियां कुल वक्फ की संपत्ति का 15 प्रतिशत हो या शिया वक्फ की संपत्तियों से होने वाली आय वक्फ की कुल आय का 15 प्रतिशत हो। याची का कहना है कि राज्य में इन दोनों में से एक भी शर्त पूरी नहीं होती है। इसलिए याची ने प्रदेश सरकार को 24 सितंबर 2019 को एक प्रत्यावेदन दिया था, जिस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
कोर्ट ने याचिका की मेरिट पर कोई विचार किए बिना राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह याची का प्रत्यावेदन वक्फ एक्ट 1995 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार निस्तारित करे।