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अधिवक्ता कल्याण निधि के वादे से पलटी सरकार

Thu, 01 Jan 2015 11:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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सूबे के वकीलों को लाभकारी योजनाओं का सब्जबाग दिखाने वाली सपा सरकार अब अपने वादे से पीछे हट रही है। सरकार की घोषणा के अनुसार अब हर नए वकील को मानदेय नहीं मिलेगा और न बुजुर्ग वकीलों को पेंशन। मृतक वकीलों के आश्रितों को पांच लाख रुपये की बीमा राशि देने की शर्तों में बदलाव हो गया है। सरकार ने इन योजनाओें का लाभ देने की शर्तें बदल दी हैं। जबकि कल्याण निधि के मद में 200 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं। इसे लेकर बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के तेवर कड़े हैं। कौंसिल बड़े आंदोलन की तैयारी कर रही है।
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बुधवार को बार कौंसिल के उपाध्यक्ष अखिलेश कुमार अवस्थी ने प्रेस वार्ता में आंदोलन की रणनीति घोषित की। उन्होंने बताया कि आंदोलन चरणबद्ध तरीके से चलाया जाएगा। इसका प्रारूप प्रदेश के सभी अधिवक्ता संगठनों से बैठक कर शीघ्र तय कर लिया जाएगा। कौंसिल की आपत्ति प्रमुख सचिव न्याय द्वारा 27 नवंबर 2014 को जारी परिपत्र को लेकर है। इसके मुताबिक पांच लाख रुपये की बीमा राशि के लिए वकीलों को 25 प्रतिशत का अंशदान देना होगा। नए वकीलों को मिलने वाले 2000 रुपये भत्ते की राशि भी अब एक हजार रुपये कर दी गई है। वह भी सिर्फ गरीब अधिवक्ताओें को मिलेगा। गरीब होने का मानक अभी तय नहीं है। सरकार का मानना है कि चूंकि सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों की नई पेेंशन नीति में पेंशन अनुमन्य नहीं है इसलिए वकीलोें को भी पेंशन देने का औचित्य नहीं है। वह चाहें तो नेशनल पेंशन योजना में अंशदान देकर शामिल हो सकते हैं। उपाध्यक्ष अखिलेश अवस्थी के मुताबिक वकील इससे सहमत नहीं हैं। इस गलत नीति के लिए सरकार और महाधिवक्ता जिम्मेदार हैं। कौंसिल की मांग है कि 15 दिन के भीतर वकीलों का भत्ता और एक जनवरी 2014 से मृतक आश्रितोें को बीमा राशि दी जाए। अन्यथा वकील प्रदेश भर में आंदोलन प्रारंभ करेंगे।
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