प्रो. दीनानाथ शुक्ल
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गंगा निर्मलीकरण के लिए लगातार चार दशक तक जनता व सरकार को जगाने वाले इस युग के भगीरथ प्रो दीनानाथ शुक्ल का शनिवार को बीमारी की वजह से निधन हो गया। वह 67 वर्ष के थे। फाफामऊ के एक निजी अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। शाम को शृंगवेरपुर घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि इकलौते पुत्र डॉ वशिष्ठ नारायण शुक्ल ने दी।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष रहे प्रो दीनानाथ को 12 दिन पहले बुखार से पीड़ित होने पर फाफामऊ के निजी अस्पताल में भती कराया गया था।
जांच रिपोर्ट में टायफाइड आने के बाद उनका उपचार शुरू हुआ। इस बीच उनकी हालत स्थिर बनी रही। पचिजनों के मुताबिक इसी दौरान उनको निमोनिया भी हो गया।
अंतत: चिकित्सकों की तमाम कोशिशों के बावजूद शनिवार की दोपहर एक बजे उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ले ली। प्रो दीनानाथ के निधन से गंगा निर्मलीकरण आंदोलन को झटका लगा है। प्रो अनुपम दीक्षित बताते हैं कि गंगा के लिए उन्होंने 1981 में छात्र जीवन से ही काम करना शुरू कर दिया था। उनके निर्देशन में गंगा जल पर लगातार शोध भी हुए और लगातार जागरूकता अभियान चलाने के लिए वह देश भर में जाने जाते थे।
वह नमामि गंगे मिशन के अलावा जलशक्ति मंत्रालय के सदस्य भी नामित किए गए थे। उनके पुत्र डॉ वशिष्ठ ने बताया कि वह पिछले 40 वर्षों से कुंभ और माघ मेला में प्रति वर्ष गंगा प्रदर्शनी के माध्यम से देश-दुनिया से आने वाले संतों-भक्तों को निर्मलीकरण के प्रति जागरूक कर रहे थे। गंगा के प्रति उनका लगाव इतना अधिक था कि वह उज्जैन, हरिद्वार और नासिक के कुंभ में भी प्रदर्शनी लगाकर लोगों को गंगा की निर्मलता के प्रति सचेत करते रहे थे। गंगा व यमुना जल प्रदूषण निवारण प्रदर्शनी के माध्यम से मोक्षदायिनी के के लिए उन्होंने केंद्र -राज्य सरकारों के साथ ही आम जन मानस को जीवन पर्यंत सचेत किया।