वामपंथी चिंतक और अंग्रेजी के विद्वान प्रोफेसर ओपी मालवीय नहीं रहे। साहित्य और प्रकृति के प्रति समर्पित प्रोफेसर मालवीय ने रविवार की आधी रात अंतिम सांस ली। परिजनों के मुताबिक वह अपनी पौत्री के पास लखनऊ गए थे। वहीं रात तकरीबन बारह बजे उन्हें तकलीफ महसूस हुई और कुछ ही देर में उनकी सांसें थम गईं। लखनऊ से उनका पार्थिव शरीर इलाहाबाद लाकर उनके कल्याणी देवी स्थित आवास पर रखा गया।
सोमवार की सुबह शवयात्रा उनके आवास से आरंभ होकर दारागंज पहुंची, जहां विद्युत शवदाह गृह में उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इससे पहले घर पर उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी के झंडे में लिपटाया गया। इंकलाब जिंदाबाद, कामरेड ओपी मालवीय को लाल सलाम के नारों के साथ शवयात्रा में उनके बेटे अमिताभ मालवीय, आनंद मालवीय, प्रियदर्शन मालवीय, शुभदर्शन मालवीय, परिमल चतुर्वेदी सहित बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
घर और घाट पर पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि देने वालों में प्रो.आरसी त्रिपाठी, प्रो अली अहमद फात्मी, प्रो संतोष भदौरिया, वरिष्ठ ट्रेड यूनियन नेता हरिश्चंद्र द्विवेदी, रविशंकर मिश्र,आलोक बोस, सुब्रत बनर्जी, सीपीआई से नसीम अंसारी, रामसागर,जवाहरलाल विश्वकर्मा, रामफेर तिवारी, दिल्ली से आए उनके शिष्य प्रो नीरज खरे, डॉ मसूद, बनारस से डॉ गोरखनाथ पाण्डेय, प्रगतिशील लेखक संघ के सुरेंद्र राही, हाईकोर्ट से फरमान रजा, जाग्रत समाज से जफर बख्त, शहरी गरीब संघर्ष मोर्चा से अंशु मालवीय, मुन्ना मजदूर, खालिद, शतदल मालवीय, बालेंदु शेखर मालवीय.अंकित अमलतास आदि शामिल थे। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी ने प्रो.मालवीय के पार्थिव शरीर पर फूल चढ़ाकर उन्हें नमन किया।