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गॉलब्लैडर कैंसर में सीटी स्कैन जरूरी

Sun, 13 Nov 2016 02:02 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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पित्ताशय (गॉलब्लैडर) कैंसर में सीटी स्कैन कराना जरूरी है। इससे कैंसर होने और सर्जरी किए जाने की जरूरत तय की जा सकेगी। यदि कैंसर शरीर के अन्य अंगों तक फैल जाता है तो गॉल ब्लैडर की सर्जरी नहीं की जाती है। मरीज के जीवित रहने की संभावना भी कम रह जाती है। मोती लाल नेहरू मेडिकल (एमएलएनएम) कॉलेज में शनिवार को सर्जरी विभाग की ओर से आयोजित यूपीएसीकॉन-2016 का आयोजन हुआ। उद्घाटन करते हुए एसजीपीजीआई लखनऊ के निदेशक एवं प्रख्यात यूरोलॉजिस्ट डॉ. राकेश कपूर ने पित्ताशय कैंसर की चर्चा की। बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने यह भी बताया कि स्टोन के चलते सामान्य पित्त की थैली का ऑपरेशन कराने से पूर्व हिस्टोपैथोलॉजी करानी चाहिए। इससे कैंसर होने का पता चल जाएगा।
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उद्घाटन सत्र में एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संतोष जॉन अब्राहम, चयनित अध्यक्ष डॉ. शिवाकांत मिश्र ने भी अपनी बात रखी। इसके पूर्व दिन भर चले तकनीकी सत्र में मुंबई से आए बैरियाटिक सर्जन डॉ. सरफाज बेग ने हार्निया के ऑपरेशन के बारे में बताया। अलीगढ़ से आए डॉ. मो. असलम ने मलाशय यानी रेक्टल कैंसर के बारे में बताया। डॉ. अशोक कुमार, डॉ. कुशल मित्तल, डॉ. महेंद्र नरवारिया, डॉ. एसके गुप्ता आदि ने अपनी बात रखी। इस मौके पर डॉ. एके गुप्ता, आर्गनाइजिंग सचिव डॉ. शबी अहमद, प्रो. प्रबल नियोगी, डॉ. एसके सरोज, डॉ. वीके पांडेय, डॉ. अशोक अग्रवाल, डॉ. संतोष समेत सर्जरी विभाग और शहर के कई सर्जन मौजूद रहे। 

बीएचयू सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. मुमताज अंसारी ने लैप्रोस्कोपी से होने वाली एडवांस सर्जरी के बारे में बताया। कहा कि इससे हार्निया और गॉलब्लैडर स्टोन की सर्जरी करने के लिए मरीज के शरीर में चार छेद की बजाय एक छेद से ही सर्जरी की जा रही है। मरीज को इसमें ज्यादा तकलीफ भी नहीं होगी और उसके शरीर में चीरा भी कम लगेगा। मरीज एक दिन में घर चला जाएगा। बताया कि नई विधि के बारे में मेडिकल कॉलेज के सर्जनों को भी प्रशिक्षित कर दिया गया है।
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मुंबई से आए जाने-माने वरिष्ठ सर्जन डॉ. परवजे सेख ने प्रोसीजर फॉर प्रोलैप्ट हैमराइज (पीपीएच) सर्जरी के बारे में बताया। कहा कि इस सर्जरी के जरिए पाइल्स के मरीजों को पांच मिनट में आराम मिल जाता है। इसमें बंदूक की तरह होने वाले स्टेप्लर का इस्तेमाल किया जाता है। पांच मिनट में मरीज को आराम मिल जाता है। बताया कि पाइल्स के हर मरीजों में सर्जरी कराने की जरूरत नहीं पड़ती है। पचास फीसदी मरीज दवा से ही ठीक हो जाते हैं। कहा देर तक टॉयलेट सीट पर बैठने से यह बीमारी ज्यादा बढ़ रही है।

तीस साल तक टाटा हॉस्पिटल मुंबई में काम कर चुके नामचीन वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. संजय शर्मा ने रोबोटिक और ब्रेस्ट इंट्राऑपरेटिव रेडियशन थिरेपी के बारे में बताया। कहा कि इसमें मरीज की सर्जरी करने के साथ रेडिएशन भी दिया जाता है। इससे ब्रेस्ट (स्तन) में फैले कैंसर की कोशिकाएं खतम हो जाती हैं। रोबोटिक सर्जरी के बारे में बताया। कहा, इसके जरिए खाने की नली और प्रोस्टैट कैंसर की सर्जरी आसानी से हो रही है। इसके फेल होने की संभावना ना के बराबर है। 

पीजीआई चंडीगढ़ से आए डॉ. टीडी यादव ने दूरबीन विधि से किए जाने वाले ऑपरेशन में होने वाले संक्रमण के बारे में बताया। कहा कि उनके सामने महीने भर में 15 मामले ऐसे सामने आते हैं जो कंप्लीकेशन (सर्जरी में परेशानी) के होते हैं। यह सर्जनों की गलती से होता है। अक्सर नए-पुराने सर्जन पित्त की नली और थैली को सही तरीके से अलग नहीं कर पाते हैं। इससे संक्रमण होता है। मरीज पीलिया की चपेट में आ जाता है और सर्जरी वाले स्थान पर दर्द बना रहता है। 
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