four murder in prayagraj
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मसलन घटना को कैसे अंजाम दिया गया, इस बाबत पुलिस के पास कोई जवाब नहीं है। सवाल यह भी है कि जिन हथियारों से घटना को अंजाम देने की आशंक जताई जा रही है, क्या उन पर मिले फिंगर प्रिंट का मिलान आरोपियों केफिंगर प्रिंट से हुआ। इसके अलावा डीएनए टेस्ट रिपोर्ट केबाबत भी पुलिस की ओर से कोई जानकारी नहीं उपलब्ध कराई गई।
घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी के साक्ष्य मसलन लोकशन, सीसीटीवी फुटेज प्राप्त हुआ है या नहीं, इस बाबत भी पुलिस कुछ नहीं बोल रही हैं। एक ही परिवार के चार लोगों की निर्ममता से हत्या की जघन्य वारदात में केवल दो ही युवक थे या इसमें अन्य लोग भी शामिल थे, इस बाबत भी पुलिस की ओर से कुछ नहीं बताया गया। गौरतलब है कि घटना वाले दिन मौका मुआयना के बाद ही अफसरों ने आशंका जताई थी कि घटना में कई लोग शामिल हो सकते हैं।
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सामने नहीं लाए गए आरोपी, गुपचुप भेजे गए जेल
इस मामले में एक और खास बात यह रही कि युवती के प्रेमी समेत दो युवकों को जेल भेजने की कार्रवाई बेहद गोपनीय तरीके से की गई। यहां तक कि उन्हें सामने भी नहीं लाया गया और गुपचुप तरीके से गिरफ्तार कर जेल भेजने की कार्रवाई की गई। बड़ी बात यह रही कि अफसर भी इस मामले में सामने नहीं आए और सामूहिक हत्या के मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी महज एक प्रेस नोट के माध्यम से उपलब्ध कराकर चुप बैठ गए।
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हिरासत में लिए गए लोगों की भूमिका भी स्पष्ट नहीं
इस मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए लोगों की भूमिका को लेकर भी कोई जानकारी अब तक नहीं दी गई है। दरअसल नामजद 11 में 10 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है जिनमें से चार को पुराने मामले में जेल भी भेज दिया गया है। हालांकि शेष संदिग्धों की भूमिका के संबंध में अफसर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। पूर्व की तरह एसपी गंगापार अभिषेक अग्रवाल से सीयूजी नंबर पर कॉल करने पर भी सपर्क नहीं हो सका।