महाजनी टोला स्थित राधा कृष्ण की माधुर्य भक्ति के आचार्य निंबार्काचार्य की ओर से स्थापित गृहस्थ गद्दी की आचार्यपीठ के डेढ़ सौ बरस पूरे होने पर आयोजित दो दिनी सार्धशताब्दी पाटोत्सव बुधवार से आरंभ हुआ। निंबार्काचार्य पीठ में पीठाधिपति गोस्वामी विष्णुकांत जी के आचार्यत्व में तुलसी सहस्रार्चन के बाद शताधिक शंखवादन एवं घंटा घड़ियाल के बीच भगवान गोपीजन वल्लभ का 151 ताम्र कलशों से ‘सानंद कुंभाभिषेक ’ किया गया।
इसके बाद नंदोत्सव के भजन के साथ शृंगार दर्शन की आरती उतारी गई। शाम को हरिनाम संकीर्तन के साथ निशा आरती उतारी गई। जयकारों के बीच भगवान गोपीजन वल्लभ और बिहारी जी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का रात तक आने का क्रम बना रहा।
दो दिनी पाटोत्सव के समापन पर बृहस्पतिवार को निर्जला एकादशी को शाम छह बजे फूलों से बिहारी जी के मनोहारी शृंगार के साथ विष्णु एवं गोपाल सहस्रनाम का सामूहिक पाठ कि या जाएगा। अमरेंद्र कुमार गोस्वामी के मुताबिक भजन संध्या होगी। निशा आरती के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।
मुगलों के शासन में वृंदावन में उपद्रव बढ़ने के बाद निंबार्क संप्रदाय के संत पहले बिंदकी रोड पर जहानाबाद पहुंचे। यहीं के संत गोस्वामी माधवलाल जी ने तकरीबन डेढ़ सौ बरस पहले प्रयागराज आकर महाजनी टोले में एक मकान खरीदा और आचार्य पीठ की स्थापना की।
इसे निंबार्काचार्य की ओर से स्थापित गृहस्थ गद्दी की अकेली आचार्यपीठ का दर्जा हासिल है। यहां बिहारी जी और गोपीजनवल्लभ देव विराजमान हैं। बाद में गोस्वामी मुरलीधर ने इसे भक्ति, संगीत और साहित्य का केंद्र बनाया। यहां पुरुषोत्तम दास टंडन, मदनमोहन मालवीय, बालकष्ण भट्ट सरीखे मनीषी आते रहे हैं। बालकृष्ण भट्ट ने ‘भारत में अंग्रेजी राज’ पुस्तक यहीं लिखी। यहां अष्टयाम सेवा सहित राधा अष्टमी, झूला उत्सव सहित अनेक आयोजन होते हैं।