महाराष्ट्र के शनि तीर्थ शनि शिगनापुर में महिलाओं के प्रवेश पर रोक को लेकर ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के इस बयान कि शनि क्रूर ग्रह है, इसलिए महिलाओं को उनकी दृष्टि से बचते हुए उनकी पूजा नहीं करनी चाहिए। उनकी पूजा महिलाओं के लिए अमंगलकारी है। यह भी कि शनि कोई देवता नहीं बल्कि ग्रह हैं। साईं की तरह उनकी पूजा का प्रचार भी सिर्फ कमाई के लिए किया जा रहा है, को लेकर धर्माचार्यों के बीच में नई बहस छिड़ गई है। थोड़े से वैचारिक मतभेद के साथ जहां कई धर्माचार्यों ने उनका समर्थन किया है, वहां कई ने उनके विचार को सिरे से खारिज करते हुए शनि पूजा की महत्ता बताई है।
काशी सुमेरू पीठाधीश्वर स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती भी कहते हैं, शनि ग्रह हैं भगवान नहीं। शास्त्रों में उनकी दृष्टि से बचने की बात कही गई हैं। शनि पूजा के बजाय शनि शांति के उपाय करने चाहिए। पौराणिक मान्यता है कि शनि को उनकी पत्नी का श्राप है जिसके कारण उनकी तरफ देखना भी अमंगलकारी है। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत स्वामी नरेंद्र गिरि कहते हैं, शनि देवता नहीं ग्रह हैं। उनकी साढ़े साती, ढैया से पीड़ित जातक ही शनि शांति कराते रहे हैं।
जहां तक महिलाओं के मंदिर में प्रवेश की बात है तो सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ने का कोई लाभ नहीं है। शास्त्रों में शनि से बचाव के उपाय ही कराए जाने का विधान है। देव प्रतिमाओं का स्पर्श तो किसी को भी नहीं करना चाहिए।वहीं स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती ने शनि पूजा को शास्त्रोक्त बताया है। कहा, नवग्रह मंडल में शनि का स्थान बड़ा है। उनकी पूजा नवग्रहों के साथ होती हैं। नवग्रह पूजन के बगैर पूजा पूर्ण नहीं होती है। रही बात महिलाओं की तो शास्त्रों में महिलाओं को खास दिनों को छोड़कर अन्य दिनों में पूजा करने पर किसी तरह की रोक नहीं है।
शनि न्याय के देव, उनका पूजन न करना कहना उचित नहीं हैं। स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ भी कहते हैं, शनि देवता हैं, ऐसे में उनकी पूजा लाभकारी है। उन्हें नवग्रह मंडल में विशेष स्थान प्राप्त हैं। छायाग्रह होने के बावजूद राहु केतु को भी देव मंडल में स्थान प्राप्त है। शनि न्याय करते हैं, इसलिए उनकी छवि कठोर है। समय-समय पर कई परंपराएं बदली हैं शनि पूजा के लिए महिलाओं की मांग भी समयानुसार ही है।
अतरसुइया स्थित शनिधाम पीठाधीश्वर पराग महराज ने शंकराचार्य की टिप्पणी पर हैरानगी जताई है। कहा, शनि न्याय के देव और पूजनीय हैं। न्याय करने की वजह से ही उन्हें क्रूर माना जाता है। शनि विग्रह को सीधी दृष्टि से नहीं बल्कि उनके चरणों में देखना चाहिए। इसी तरह प्रतापगढ़ के विश्वनाथगंज स्थित शनिदेव धाम कुशफरा के महंत स्वामी परमानंद उर्फ परमा महाराज कहते हैं, शनिदेव को लेकर की गई स्वामी स्वरूपानंद की टिप्पणी खेदजनक है। उन्हें न्याय के लिए अधिकृत किया गया है। उन्हें सिर्फ ग्रह कहना उचित नहीं। सनातन धर्म में महिलाओं को बराबर का सम्मान है, सीता ने भी यहां पर शनिदेव की पूजा की थी। इसलिए महिलाओं को शनि की पूजा करनी चाहिए। शनि न्याय के देव हैं इसलिए उनका मंदिर भी जरूरी है।