कोरोना संक्रमण ने लोगों की जिंदगी बचाने वालों को भी नहीं बक्शा, एक, दो नहीं लंबी सूची है, जिसमें कोरोना से संघर्ष करने वाले जिंदगी की जंग हार गए। पहली लहर में तो कोरोना के नोडल अधिकारी रहे डॉ. गणेश प्रसाद, डॉ. अनुपम जायसवाल सहित तमाम विशषेज्ञ हैं, जो कोरोना को मात देने के बाद की दुश्वारियों से नहीं उबर पाए, आखिर में उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
इस बार की दूसरी लहर में नामचीन चिकित्सकों पर कोरोना संक्रमण भारी पड़ा। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एके बजाज, डॉ. मिलन मुखर्जी, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजय पांडेय, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. विष्णु गोयल, फिजीशियन डॉ. भरत अरोरा, डॉ. जेके मिश्रा, मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के अध्यक्ष रहे डॉ. पीसी मिश्रा, सर्जन डॉ. अनिल सरोज, डॉ. जेके मिश्रा आदि की जान पर कोरोना संक्रमण भारी पड़ा। ये धरती के भगवान किसी तरह कोरोना के संक्रमण से तो मुक्त हुए पर पोस्ट कोविड दिक्कतों और फेफड़ों की फाइब्रोसिस उनके लिए जानलेवा बन गई।
एहतियात नहीं आए काम, लखनऊ से दिल्ली तक दौड़ हुई बेकार
विशेषज्ञ चिकित्सकों में अधिकतर नाम ऐसे हैं, जिन्हें कोरोना संक्रमण के बाद यानी पोस्ट कोविड दिक्कतों के कारण जान गंवानी पड़ी। इनमें कई चिकित्सक एसजीपीजीआई लखनऊ तो कई दिल्ली के सर गंगा राम, एम्स तक इलाज कराने गए, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। जेके मिश्रा जैसे कई चिकित्सक ऐसे रहे जिन्हें एलथ्री एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहां उनके सहपाठियों और छात्र रहे चिकित्सकों ने इलाज किया पर उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। डॉ. एके बजाज को दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहीं रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजय पांडेय, रेडियोलॉजिस्ट विष्णु गोयल, डॉ. मिलन मुखर्जी, डॉ. अनिल सरोज जैसे कई चिकित्सकों को स्थानीय अस्पतालों में इलाज के दौरान हालत बिगड़ने पर एसजीपीजीआई लखनऊ में भर्ती कराया गया था।
अधिकतर डॉक्टर रहे एमएलएन मेडिकल कॉलेज के छात्र, एएमए सदस्य
कोविड संक्रमण से जान गंवाने वालों में अधिकतर चिकित्सकों ने अपनी मेडिकल की पढ़ाई मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से ही की। कई कॉलेज के पहले एचओडी भी रहे। डॉ. एके बजाज के शोधों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली। वहीं डॉ. मिलन मुखर्जी कुशल चिकित्सक के साथ सामाजिक गतिविधियों में शामिल रहे।
ब्लैक फंगस ने ली थी डॉ. संजय की जान
रेडियोलॉजिस्ट डॉ. संजय पांडेय की विशषज्ञता ऐसी थी कि उनकी अल्ट्रासाउंड और सीटी स्कैन की रिपोर्ट किसी भी चिकित्सक को इलाज की दिशा देने वाली होती थी। संक्रमण के दौरान दो बार अपने डायग्नोस्टिक सेंटर में उन्होंने खुद का सीटी स्कैन कराया और रिपोर्ट खुद तैयार की थी। एक बार तो उपचार के दौरान एंबुलेंस से ऑक्सीजन सपोर्ट पर आए थे। कोरोना संक्रमण से वह उबरे तो उन्हें ब्लैक फंगस संक्रमण हो गया। साथी चिकित्सकों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए एसजीपीजीआई रेफर किया। जहां लंबे संघर्ष के बाद उन्होंने अंतिम सांस ली।
अब यादों में रहेंगे ये विशेषज्ञ चिकित्सक
कोरोना संक्रमण काल में जान गंवाने वाले 26 चिकित्सकों की कमी हमेशा खलेगी। अब यह बात मायने नहीं रखती कि वह कोरोना संक्रमित थे या संक्रमण मुक्त हो चुके थे, बल्कि यह सच है कि उनकी जान पर कोरोना भारी पड़ा। वहीं करीब दस ऐसे चिकित्सक भी अब हमारे बीच नहीं है, जिनकी मौत अन्य कारणों से हुई।
डॉ, एसपी द्विवेदी, 0 डॉ. गणेश प्रसाद, डॉ. वकील खान, डॉ. अनुपम जायसवाल, डॉ. कमलेश कुमार, डॉ. एके बजाज, डॉ. माधुरी सिंह, डॉ. पीके गुप्ता, डॉ.मिलन मुखर्जी, डॉ. जेके मिश्रा, डॉ. अनंत शुक्ला, डॉ. आरसी पांडेय, डॉ. संदीप रत्न, डॉ. पीसी मिश्रा, डॉ. एसके राठी, डॉ. सुदीप वर्मा, डॉ. नीरज शर्मा, डॉ. गंगाराम, डॉ. केजी मिश्रा, डॉ. भरत अरोरा, डॉ. प्रशांत सिन्हा, डॉ. एमए हक, डॉ. संजय पांडेय, डॉ. अनिल सरोज, डॉ. शुभ्रा फिलिप्स, डॉ. विष्णु गोयल
एएमए, एल्युमिनाई एसोसिएशन ने दी श्रद्धांजलि
इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन और एमएलएन मेडिकल कॉलेज एल्युमिनाई एसोसिएशन ने कोरोना संक्रमण काल में जान गंवाने वाले सदस्य चिकित्सकों को श्रद्धांजलि दी है। एएमए सचिव डॉ. राजेश मौर्या के मुताबिक जिन 26 चिकित्सकों की कोरोना काल या संक्रमण से मृत्यु हुई, उन्हें एसोसिएशन सदस्य कभी भुला नहीं पाएंगे। वहीं एल्युमिनाई एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आलोक मिश्रा ने कहा कि हमने सदस्यों को ही नहीं अपने तेज तर्रार सक्रिय सचिव डॉ. अनिल सरोज को ही खो दिया। अब सभी यादों में ही रहेंगे।