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अपनी प्रतिभा को सहेज कर नहीं रख सके नीलाभ

Sun, 24 Jul 2016 02:23 AM IST
दूधनाथ सिंह
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नीलाभ अश्क - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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मेरी तो समझ में ही नहीं आ रहा है कि मैं क्या कहूं। पिछली 18 या 19 जुलाई को उनका फोन आया था। इस संदेश के साथ कि मेरी तबीयत बहुत खराब है और भूमिका से संभालना मुश्किल हो रहा है, मांजी चली आएं, मैं उनसे क्षमा मांग चुका हूं। मैंने यह संदेश भूमिका की मां को दिया लेकिन उन्होंने यह कहते हुए सख्ती से मना कर दिया कि नीलाभ में मेरे परिवार की बहुत बेइज्जती की है, मैं वहां नहीं जाऊंगी। फिर उनकी पत्नी भूमिका का भी एक लंबा-चौड़ा एसएमएस आया कि नीलाभ की हालत ठीक नहीं है। नसों में भीतर तक खून के थक्के  जमे हुए है और वह उठकर चलफिर नहीं सकते हैं। यह अंतिम दिनों की बात है।
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नीलाभ ने बहुत सारी भावुकतापूर्ण गलतियां कीं। उन्होंने सभी से अपने को काट लिया था। उनमें बहुत सारी खूबियां थीं तो बहुत सारी कमियां भीं। बावजूद इसके वह नरमदिल आदमी थे। जब इलाहाबाद में उनकी रोजीरोटी के लिए कुछ नहीं बचा तो वह दिल्ली चले गए। रोजी रोटी की फिक्र में उन्होंने लिखना-पढ़ना कम कर दिया था और पूरी तरह से अनुवाद में जुट गए थे, इसमें ज्यादा पैसे मिलते थे।

जहां तक नीलाभ की प्रतिभा का सवाल है, वह काफी प्रतिभाशाली थे। वह बड़े कवि और आलोचक थे। उनका लिखा-पढ़ा बहुत महत्वपूर्ण है। कविता संग्रह ‘संस्मरणांरभ’ बहुत चर्चित रहा। वह श्रेष्ठ कोटि के अनुवादक थे। उनका हिन्दी, अंग्रेजी और उर्दू तीनों भाषाओं पर अधिकार था। वह स्पेनिश भी अच्छी तरह जानते थे। उन्होंने पाब्लो नरुदा की कविता का अनुवाद किया था। अरुंधति राय के उपन्यास ‘गॉड ऑफ स्माल थिंग्स’ का ‘मामूली चीजों का देवता’ नाम से अनुवाद बहुत चर्चित रहा।
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उनकी प्रतिभा का कोई जवाब नहीं था। इसे संभाल कर रखना चाहिए था लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिभा को बिखरा दिया। वह बहुत से ऐसे कामों में लगे रहे, जिसका कोई अर्थ नहीं। जब उनकी पहली शादी हुई तब ज्ञानरंजन और रवींद्र कालिया ने रिक्शा पर बिठा कर खुसरो बाग के चक्कर लगाए थे।  उस जमाने में अश्क जी का घर साहित्यकारों का तीर्थ हुआ करता था। रवींद्र कालिया तो उनके घर छह महीने तक रहे। बाद में नीलाभ ने वह घर बेच दिया और उन्होंने यह गलती स्वीकारी भी। नीलाभ को इस बात की तकलीफ थी। कहते थे, मुझे एनेक्सी नहीं बेचनी चाहिए थी। उन्होंने पहला घर पत्नी रानी और दूसरा दिल्ली का घर भूमिका के नाम कर दिया था।जहां तक स्त्रियों की बात है तो उनके प्रति उनमें एक विशिष्ट तरह की कमजोरी थी। चाहे लग रानी हों या फिर भूमिका या फिर यासमीन। हालांकि यासमीन के प्रति उनका मोहभंग हुआ तो वह फिर भूमिका के पास लौट आए। जो भी हो नीलाभ का जाना बेहद तकलीफदेह है, उसकी कमी हमेशा खलेगी।
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(प्रख्यात कथाकार और भारत भारती पुरस्कार से सम्मानित)
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