किसी जमाने में नगर पालिका परिषद के सभासद रहे हरमूदुल हसन के तीन पोतों में गुलाम हसन दूसरे नंबर का था। उमेश पाल की हत्या के बाद फरारी के दौरान ही रसूलाबाद में उसका पुश्तैनी मकान बुलडोजर से ढहाया जा चुका है। वर्ष 2010-12 में वह नगर निगम में ठेकेदारी कर रहा था।
उसी दौरान ठेकेदार चंदन से विवाद होने पर उसने उसे गोली मार दी थी। तभी से वह अपराध जगत में अपनी दखल बढ़ाने लगा था। वह कई माफिया अतीक अहमद के संपर्क में रहा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई के दौरान वह संकाय का चुनाव भी लड़ चुका था। पिता मासूदुल हसन और मां खुशनुदा रसूलाबाद के पुश्तैनी मकान में एक कमरा गुलाम को मिला था। पड़ोसियों के मुताबिक वह उस घर में कभी-कभार ही आता था। अक्सर वह कई दिनों तक बाहर ही रहता था।