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Prayagraj News: हिंदी की किताबों से जेन-जी की दोस्ती

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प्रभात सिंह, राजपुर
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सोशल मीडिया, रील्स और हिंग्लिश के दौर में पली-बढ़ी जेन-जी अब हिंदी की किताबों की ओर भी लौट रही है। शहर के पुस्तक विक्रेताओं के अनुभव बताते हैं कि दो वर्षों में हिंदी की किताबों को लेकर युवाओं की रुचि में खासा बदलाव आया है।
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20 से 30 वर्ष की उम्र के युवा अब अपनी पसंद से हिंदी साहित्य की पुस्तकें तलाश रहे हैं। उनकी पसंद में नई पीढ़ी के लेखक और पुरानी चर्चित रचनाएं दोनों शामिल हैं।
धर्मवीर भारती की ‘गुनाहों का देवता’, फणीश्वर नाथ रेणु की ‘मैला आंचल’, श्रीलाल शुक्ल की ‘राग दरबारी’ और ममता कालिया की ‘जीते जी इलाहाबाद’ जैसी किताबों के साथ दिव्य प्रकाश दुबे और मानव कौल जैसे नए दौर के लेखकों की रचना भी युवाओं को आकर्षित कर रहा है।
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लेखक नीलोत्पल ‘मृणाल की डार्क हॉर्स’ (साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार से सम्मानित) भी युवाओं की खास पसंद में शामिल है। कटरा स्थित इंडिगो बुक शॉप के अनुराग मौर्य कहते हैं कि दो साल पहले इन किताबों को कोई पूछता ही नहीं था लेकिन अब इनकी बिक्री और मांग में बदलाव तेजी से बढ़ी है।
युवाओं के बीच खासकर दिव्य प्रकाश दुबे और मानव कौल पढ़े जा रहे हैं। वहीं ‘गुनाहों का देवता’ की मांग भी पिछले दो सालों तेजी से बढ़ी है। विदेश से अब इसके अंग्रेजी संस्करण भी आ रही है। यह बदलाव बताता है कि हिंदी साहित्य को लेकर पाठकों की दिलचस्पी खत्म नहीं हुई, बल्कि उसका दायरा बढ़ रहा है।
‘मुसाफिर कैफे’ का अंग्रेजी संस्करण भी दुनियाभर में लोकप्रिय हो रहा है। अंग्रेजी और हिंदी की किताबों की जेन जी की पसंद में 60:40 का अनुपात देखने को मिलता है लेकिन जेन जी अब हिंदी की किताबों से भी दोस्ती करते नजर आ रही है। संवाद

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साहित्य भी बनी पहली पसंद
वाणी प्रकाशन के मैनेजर योगेंद्र यादव के अनुसार 20 से 30 वर्ष की उम्र के युवा हिंदी की किताबें अधिक खरीद रहे हैं। उनकी पसंद में ‘गुनाहों का देवता’, ‘मुझे चांद चाहिए’, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ और ‘कसाईबाड़ा’ जैसी किताबें शामिल हैं। हिंदी की किताबों के लिए युवाओं में रुचि बढ़ रही है। लोकभारती प्रकाशन के संरक्षक रमेश ग्रोवर के अनुसार युवा ‘रेत की मछली’, ‘जीते जी इलाहाबाद’, ‘विकल्पहीन है दुनिया’, ‘मैला आंचल’ और ‘राग दरबारी’ जैसी किताबों को खूब पसंद कर रहे हैं।

बोलचाल की भाषा से जुड़ रहे युवा
कटरा स्थित सबद की संचालिका सुनीता के अनुसार, दिव्य प्रकाश दुबे ऐसी हिंदी में लिख रहे हैं जो युवाओं की रोजमर्रा की बातचीत के करीब है। चेतन भगत और मानव कौल भी युवाओं में पढ़े जा रहे हैं। बोलचाल के शब्द, छोटे वाक्य और रोजमर्रा के अनुभवों से जुड़ी कहानियां युवाओं को कठिन और किताबी भाषा की तुलना में अधिक सहज लगती हैं।

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आजाद रीड्स ग्रुप में 3,500 से अधिक सदस्य हैं। इनमें करीब 2,000 युवा हिंदी किताबों में रुचि रखते हैं। युवाओं में हिंदी के प्रति नया झुकाव नहीं, बल्कि मातृभाषा से आत्मीय जुड़ाव बढ़ा है। युवाओं को ऐसी भाषा और किरदार अधिक पसंद हैं, जिनसे वे अपने आज के जीवन को जोड़ पाते हैं। - राघव मिमानी, संस्थापक, आजाद रीड्स



मुझे ‘शेखर : एक जीवनी’ सबसे अधिक पसंद आई। किताबें दिमाग की खिड़कियां खोलती हैं और नए विचारों से परिचय कराती हैं। हिंदी युग्म की ओर से प्रकाशित किताबों में भी सरल भाषा और छोटे आकार पर जोर दिया जा रहा है। - प्रभात सिंह, राजापुर
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स्कूल की लाइब्रेरी से प्रेमचंद को पढ़ना शुरू किया था। इसके बाद जयशंकर प्रसाद और हजारी प्रसाद द्विवेदी से होते हुए हिंदी कविता से परिचय हुआ। मानव कौल और दिव्य प्रकाश दुबे की किताबें भी पढ़ना पसंद है। - अक्षत सिंह
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हिंदी साहित्य के प्रति मेरा रुझान पिताजी से आया है। मुझे विशेष रूप से शुद्ध हिंदी और संस्कृतनिष्ठ भाषा में लिखी कहानियां व साहित्य पढ़ना पसंद है। प्रेमचंद, दिनकर और निराला जैसे साहित्यकार पसंद हैं। नई हिंदी साहित्य को ज्यादा नहीं पढ़ा है लेकिन उसे भी आगे पढ़ने और समझने की इच्छा है। - तान्या मिश्रा, मम्फोर्डगंज

हिंदी अनुवादित पुस्तकों की बढ़ी मांग
अंग्रेजी की चर्चित किताबों के हिंदी अनुवाद भी युवाओं के बीच जगह बना रहे हैं। इनमें ‘हू मूव्ड माई चीज?’, ‘द लिटिल प्रिंस’, ‘द अलकेमिस्ट’, ‘द ओल्ड मैन एंड द सी’ और ‘ट्यूजडेज विद मॉरी’ युवाओं की खास पसंद में हैं। इनके साथ ‘जोनाथन लिविंग्सटन सीगल’, ‘एनिमल फार्म’, ‘द फाइव पीपल यू मीट इन हेवन’, ‘द मोंक हू सोल्ड हिज फेरारी’ और ‘द रिचेस्ट मैन इन बेबिलोन’ के हिंदी रूपांतरण भी पसंद आ रहे हैं।
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प्रभात सिंह, राजपुर

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