इलाहाबाद (ब्यूरो)। अश्विन मास कृष्णपक्ष में पितरों के श्राद्ध तर्पण को संगम समेत गंगा के विभिन्न तटों पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा है। तीर्थ पुरोहितों की देखरेख में यजमानों द्वारा कर्मकांड पूरे किए जा रहे हैं। मंगलवार को जिनकी तिथि (द्वितीया) थी उनका श्राद्ध तर्पण किया गया। गया जाने वाले श्रद्धालुओं का प्रयाग आकर तर्पण पूजन करने का क्रम जारी है।
ब्रह्ममुहूर्त से संगम सहित गंगा के विभिन्न तटों पर पर भी पिंडदान, तर्पण, श्राद्ध को श्रद्धालु जुटे। तीर्थपुरोहितों की देखरेख में गंगा स्नान कर परंपरागत रीति से पितरों के निमित्त पिंडदान, तर्पण और श्राद्धकर्म पूरा किया गया। सामर्थ्य एवं श्रद्धा अनुसार गोदान, वस्त्र अन्न दान किया गया। तीर्थपुरोहित अनूप त्रिपाठी निशान पीली कोठी के मुताबिक संगम पर , संगम तट पर पिंडदान एवं तर्पण का विशेष फल है। मत्स्य पुराण में उल्लेख है कि संगम क्षेत्र भगवान विष्णु के मुख समान है, यहां पर किए गए तर्पण से पुरखों को तृप्ति मिलती है। गया में पिंडदान करने से पहले प्रयाग में पिंडदान का विधान है।