जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा व उनकी टीम ने स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) चिकित्सालय का बृहस्पतिवार की सुबह औचक निरीक्षण किया। जिलाधिकारी सबसे पहले ट्रॉमा सेंटर पहुंचे जहां उन्होंने शिकायत पेटिका खुलवाई। पेटिका में उन्हें कूड़े का ढेर और दो-तीन शिकायती पत्र मिले। इनमें डायलिसिस सेंटर में प्रयोग होने वाले सामान और दवाएं बाहर से मंगाए जाने की शिकायत मिली।
जिलाधिकारी ने चिकित्सालय के सभी ब्लाकों और जनपद के सभी प्रमुख चिकित्सालयों व सीएचसी, पीएचसी में शिकायत व सुझाव पेटिका रखे जाने का आदेश दिया। उन्होंने का कि पेटिका की चाबी सुरक्षित रखी जाए। साथ ही हर 15 दिन में उच्च अधिकारियों की उपस्थिति में इसे खोलकर सुझावों व शिकायतों पर प्रभावी और उचित कार्रवाई की जाए।
जिलाधिकारी ने निरीक्षण के दौरान चिकित्सकों की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई और प्रिंसिपल व संबंधित विभागाध्यक्षों को चिकित्सकों और कर्मचारियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने अनुपस्थित चिकित्सकों व कर्मचारियों का एक दिन का वेतन रोकने के साथ स्पष्टीकरण मांगने के निर्देश दिए।
मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह ने अपर जिलाधिकारी नगर व अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम के साथ अस्पताल परिसर, वार्डों, शल्य कक्ष, प्रसूति कक्ष, औषधि भंडार, परीक्षण प्रयोगशाला, रोगी परामर्श कक्ष का निरीक्षण किया।
ओपीडी के निरीक्षण में दंत विभाग के डॉ. शरद चंद्र, मेडिसिन के डॉ. सत्यम अग्रवाल, ईएनटी विभाग के डॉ. आनंद प्रकाश, डरमेटोलॉजी विभाग के डॉ. एसके ओझा, आर्थोपेडिक विभाग के डॉ. अहमद हसन, मनोचिकित्सा विभाग के डॉ. शैलेन्द्र कुमार मिश्रा, क्षय रोग विभाग के डॉ. एडी शुक्ला अनुपस्थित मिले।
औषधि भंडार में पैराटोप मेडिसिन की उपलब्धता कंप्यूटर में 139 थी जबकि मौके पर मात्र 100 और सिट्राजिन की उपलब्धता 80 के सापेक्ष 75 पाई गई। आपातकालीन सेवाओं के निरीक्षण में जीवन रक्षक दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता सीमित मिली।
प्रसूती कक्ष और शिशु वार्ड के निरीक्षण के समय कोई प्रभारी चिकित्सक उपस्थित नहीं पाया गया। प्री-लेबर रूम में एसी नहीं मिला और पर्याप्त साफ-सफाई भी नहीं थी। निरीक्षण के दौरान अपर जिलाधिकारी नजूल संजय पांडेय, अपर जिलाधिकारी नगर सत्यम मिश्र, अपर नगर मजिस्ट्रेट प्रथम अविनाश यादव, अपर नगर मजिस्ट्रेट द्वितीय प्रेम नारायण प्रजापति आदि मौजूद रहे।