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मौनी अमावस्या पर भी नहीं साफ होगी गंगा

Mon, 21 Jan 2013 11:40 AM IST
इलाहाबाद/ब्यूरो
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मुख्य स्नान पर्वों पर गंगा में साफ जल के दावे की हवा निकलती नजर आ रही है। पहले शाही स्नान के सप्ताहभर बाद भी गंगा में खास परिवर्तन नहीं हुआ है। आज भी उसका रंग काला है और फाफामऊ से लेकर संगम तक पानी काफी कम होने के कारण जगह-जगह टापू बन गए हैं।
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गंगा की इस हालत पर दिल्ली से आई संसदीय टीम ने भी चिंता जताई। निरीक्षण के दौरान टीम के सदस्यों ने गंगा जल के लिए टिहरी पर निर्भरता खत्म करने की बात कह कर यह भी इशारा कर दिया है कि आने वाले समय में वहां से पानी मिलना मुश्किल होगा। ऐसे में मौनी अमावस्या पर भी गंगा में साफ जल नसीब होने की उम्मीद कम है।

गंगा में प्रदूषण खत्म करने, पर्याप्त मात्रा में पानी रहे, इसके लिए कई वर्षों से प्रयास जारी हैं। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई ने आधा दर्जन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बना दिए। 40 से ज्यादा नालों को टेप कर दिया लेकिन गंगा की हालत में कोई सुधार नहीं आया। केंद्र और राज्य सरकार ने दावा किया था कि महाकुंभ के दौरान संगम पर पर्याप्त मात्रा में पानी पहुंचेगा और उसका रंग भी साफ हो जाएगा लेकिन ऐसा आज तक नहीं हुआ।
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हालांकि नरौरा से 2500 क्यूसेक पानी 18 दिसंबर से प्रतिदिन छोड़ा जा रहा है लेकिन यह पानी संगम तक पहुंचने के बजाए नहरों में जा रहा है। खेती का सीजन होने के कारण नहरें पूरी क्षमता से चल रही हैं। संगम तक यह पानी पहुंचा होता तो उसका रंग भी साफ हो जाता और जगह-जगह टीले भी न दिखते।

मेला शुरू होने के बाद से अब गंगा का पानी स्नान योग्य नहीं है। इसमें बीओडी की मात्रा चार से पांच मिलीग्राम प्रतिलीटर के बीच लगातार बनी हुई है। संसदीय टीम ने गंगा की इस हालत पर चिंता जताई है। टीम की सदस्य सांसद माया सिंह ने टिहरी पर निर्भर रहने के बजाए गंगा एक्शन प्लान पर गंभीरता और तेजी से काम करने का सुझाव दिया है। इसके लिए वर्षों से काम कर रहे अफसरों पर कितना असर होगा, यह आने वाले समय में पता चलेगा।
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