कहा जा रहा है कि गंगा की धारा निर्माणाधीन पिलरों से टकराकर पूरब की ओर मुड़ती जा रही है। इस वजह से पूरब की ओर गंगा का प्रवाह मुड़ रहा है और कटान का दायरा बढ़ रहा है, जबकि पश्चिम और दक्षिण की ओर रेत के टीले उभर रहे हैं। यही वजह है कि संगम घाट के सामने डेढ़ सौ मीटर के दायरे में रेत का टापू बन गया है।
तीर्थपुरोहित राजमणि तिवारी बताते हैं कि 2013 में जून के महीने में अरैल घाट की ओर शिफ्ट हुआ था। लेकिन, दशक भर के भीतर यह पहली घटना है, जब संगम स्नान के लिए अरैल घाट तक की यात्रा श्रद्धालुओं को करनी पड़ रही है। जय त्रिवेणी जय प्रयाग संस्था के अध्यक्ष तीर्थपुरोहित प्रदीप कुमार पांडेय ने बताया कि बैराजों से पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। इससे धारा कमजोर हो गई है। रेलवे पुल के पिलरों के निर्माण और खुदाई से भी धारा बदल रही है। इस वजह से गंगा के पूर्वी तट की ओर कटान शुरू हो गई है।
गंगा में रेलवे ब्रिज के लिए पिलर ख़ड़े किए जा रहे हैं। इससे फाफामऊ की ओर से आने वाली गंगा की धारा उन पिलरों से टकरा कर पूरब की ओर मुड़ रही है। धारा बदलकर छतनाग और सोमेश्वर महादेव के सामने तट से टकरा रही है। इस वजह से संगम स्थल की शिफ्टिंग स्वाभाविक है। - प्रो. जेएन त्रिपाठी, विभागाध्यक्ष- भू एवं ग्रहीय विज्ञान विभाग, इलाहाबाद विश्वविद्यालय।
शिफ्टिंग रोकने के लिए गंगा में ड्रेजिंग आरंभ
शिफ्टिंग रोकने के लिए गंगा में ड्रेजिंग शुरू करा दी गई है। मंगलवार को संगम पर एक जेसीबी लगाकर खुदाई कराई गई। ताकि प्रवाह की नई दिशा बनाई जा सके। मेला प्राधिकरण का मानना है कि पूर्व निर्धारित स्थल पर गंगा का प्रवाह आ जाने के बाद लोगों को डुबकी के लिए अधिक दूरी तय नहीं करनी पड़ेगी। साथ ही अरैल के सामने पहुंचे संगम तक मोटरसाइकल से श्रद्धालुओं का आवागमन भी रोका जा सकेगा। दो दिन पहले गंगा में डूबे पांच युवक मोटरसाइकिल से ही वहां पहुंचे थे। अब ड्रेजिंग कर नई धारा बनाए जाने से मौजूदा संगम घाट तक मोटरसाइकिल से पहुंचने का रास्ता भी बंद किया जा सकेगा।