इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंगा प्रदूषण मामले में तलब प्रमुख सचिव पर्यावरण उत्तर प्रदेश ने सफाई दी। कहा कि हलफनामे अधिवक्ता के मार्फत ही दाखिल किए जाएंगे। महाधिवक्ता अजय कुमार मिश्र ने कहा सरकार ने इस संबंध में उचित निर्देश जारी कर दिए हैं। पिछली तारीख पर प्रमुख सचिव के दाखिल हलफनामे की भ्रमात्मक खामियों को लेकर कोर्ट ने उन्हें बुलाया था। उन्होंने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट सहित नालों की सफाई की योजना की जानकारी दी। महाधिवक्ता ने कहा 2025 के महा कुंभ तक गंगा में प्रदूषित पानी जाने से रोकने व शोधन क्षमता बढ़ाने की योजना तैयार कर सरकार लागू करेगी। गंगा प्रदूषण की जनहित याचिका की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल, न्यायमूर्ति एम के गुप्ता तथा न्यायमूर्ति अजित कुमार की पूर्णपीठ कर रही है।
कोर्ट ने जल की सैंपलिंग पर भी खड़े किए सवाल
कोर्ट ने एसटीपी की क्षमता से अधिक पानी जाने से शोधन कार्यवाही पर सवाल खड़े किए। माघ मेले में अस्थाई एसटीपी व नाले के बॉयोरिमेडियल शोधन की खामियों का जिक्र किया और कहा कि अनावश्यक धन खर्च हो रहा है। कोर्ट ने गंगा जल की सैंपलिंग (नमूना) तरीके पर भी सवाल किए और कहा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यवाही की परख के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से रिपोर्ट मंगाई। भारी अंतर पता चला। एसटीपी मानक का पालन नहीं कर रही। जबकि, राज्य प्रदूषण बोर्ड सही होने की रिपोर्ट दे रहा है।
प्रमुख सचिव ने कहा बोर्ड स्वायत्त संस्था है। उसे कार्रवाई करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि बॉयोरिमेडियल सिस्टम का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। केवल शोधन की खानापूरी की जा रही है। बैक्टीरिया गंगा में जा रहे। न्यायमित्र अरूण कुमार गुप्ता ने इजराइल की तकनीकी का हवाला दिया और कहा कि तकनीकी से गंदे पानी को पीने लायक बनाया जा रहा है। समुद्र का पानी पीने लायक बनाया जा रहा है।
माघ मेले में काले हुए गंगा जल का फोटो किया गया पेश
उन्होंने कानपुर के चमड़ा उद्योगों से गंगा प्रदूषण का मुद्दा उठाया। साथ ही प्रयागराज में 40 फीसदी सीवर लाइन एसटीपी से न जोड़े जाने से गंगा प्रदूषित होने की बात की। अधिवक्ता विजय चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि एसटीपी से शोधित पानी को खेती की सिंचाई के काम लाने की योजना पर अमल करने का आदेश दिया जाए। उन्होंने माघ मेले में काले हुए गंगा जल के फोटो ग्राफ पेश किए।
शैलेश सिंह ने एसटीपी के ओवर फ्लो का मुद्दा उठाया। कोर्ट ने आने वाली आबादी को ध्यान में रख सालिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लॉन तैयार करने को कहा और याद दिलाया कि तकनीकी से इससे राजस्व की प्राप्ति की जा सकती है। कोर्ट ने प्लास्टिक कचरे के निस्तारण व पैकिंग में इसका इस्तेमाल नियंत्रित करने की बात कही। अरूण गुप्ता ने प्लास्टिक बैन करने की बात की। महाधिवक्ता ने कानपुर चर्म उद्योगों के टैप किए जाने की जानकारी दी। इस पर कोर्ट ने कहा सब कुछ बंद कर गंगा साफ करने के बजाय प्रबंधन उपाय किए जाएं। याचिका की अगली सुनवाई 22 फरवरी को होगी।