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18 माह में बदलेगी घाटों की सूरत

Wed, 04 Jan 2017 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
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इलाहाबाद में गंगा और यमुना किनारे के घाटों की अर्द्धकुंभ मेला के पहले तक सूरत बदल जाएगी। इन घाटों को नया रूप दिया जाएगा। साथ ही सात स्थानों पर शवदाह गृह का निर्माण कराया जाएगा। आधुनिक तकनीक से बनने वाले शवदाह गृह में शवों का अंतिम संस्कार बेहद कम लकड़ी में होगा और इसमें धुआं भी नहीं होगा। नमामि गंगे योजना के तहत होने वाले इस काम के लिए केंद्र सरकार ने 80 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इस काम की जिम्मेदारी इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड फर्म को दी गई है। बुधवार को बोट क्लब काली घाट पर भूमिपूजन के साथ काम शुरू होगा और 18 माह में पूरा होगा।
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गंगा-यमुना के किनारे के घाटों की स्थिति बेहद खराब है। इनके सुंदरीकरण की मांग लंबे समय से हो रही थी। कई मौकों पर इलाहाबाद आई केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा कायाकल्प मंत्री उमा भारती के सामने भी यह मामला उठा था। समाजसेवी एवं पूर्व पार्षद कमलेश सिंह भी इसकी मांग लंबे समय से कर रहे थे। इसके बाद सरकार ने नमामि गंगे योजना के तहत घाटों की सूरत बदलने और नए शवदाह गृह बनाने की अनुमति दे दी। 80 करोड़ की लागत वाली इस योजना के लिए इलाहाबाद विकास प्राधिकरण को नोडल एजेंसी बनाया गया है। योजना के तहत गंगा किनारे रसूलाबाद घाट, फाफामऊ घाट, यमुना किनारे बोट क्लब, सरस्वती घाट, काली घाट, बलुआघाट, गऊघाट, अरैल घाट और बरगद घाट का सुंदरीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।

इसके तहत जहां पहले से घाट बने हैं उनके सुधार और अन्य स्थल पर घाट का निर्माण होगा। सीढ़ियां, पाथ-वे, आईलैंड, आकर्षक लाइटें समेत अन्य ढेरों काम होंगे। इसी तरह गंगा किनारे कन्हईपुर, झूंसी, दारागंज, फाफामऊ, रसूलाबाद तथा यमुना किनारे ककरहा घाट एवं बरगद घाट पर शवदाह गृह बनाया जाएगा। आधुनिक तकनीक से बनने वाले शवदाह गृह में मात्र सौ किलोग्राम लकड़ी में शव का अंतिम संस्कार हो जाएगा। इसमें धुआं भी नहीं होगा, जिससे वायु प्रदूषण की समस्या नहीं होगी। इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड के वर्क मैनेजर प्रमोद प्रसाद ने बताया कि  इसे पूरा करने के लिए 18 माह की समय सीमा निर्धारित की गई है। 
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