इलाहाबाद। संगम क्षेत्र के तकरीबन जलमग्न होने के साथ ही अब गंगा त्रिवेणी बांध स्थित बड़े हनुमान के पांव पखारने को आतुर हैं। शुभता का यह संयोग पल-पल पूर्णता की ओर है। जलस्तर में हो रही बढ़ोतरी से बृहस्पतिवार देर रात तक गंगा मंदिर की चौखट तक पहुंच गईं। उधर, मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी आनंद गिरि के मुताबिक मंदिर की ओर से गंगा के स्वागत और नई पूजा व्यवस्था की तैयारी पूरी कर ली गई है।
शाम तक गंगा के चौखट पर दस्तक देने के साथ ही लेटे हनुमान तक पहुंचने की संभावना प्रबल हुई। गंगा के गर्भगृह में प्रवेश करने के साथ ही घंटा, घड़ियाल के साथ पहले गंगा और फिर लेटे हनुमान जी की पूजा-अर्चना की जाएगी। पूजा के बाद शयनमुद्रा में पहुंचने पर लेटे हनुमान को श्वेत चादर का आवरण दिया जाएगा।
जलमग्न होने के बाद लेटे हुए हनुमान मंदिर में रखी ‘छोटी प्रतिमा’ को ही प्रतिनिधि के रूप में घंटा-घड़ियाल बजाते हुए खडे़ हनुमान मंदिर ले जाकर स्थापित किया जाएगा। गंगा के लौटने के बाद ही लेटे हुए हनुमान मंदिर में दोबारा आरती-पूजन का क्रम आरंभ होगा।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और मठ बाघंबरी गद्दी के महंत नरेंद्र गिरि कहते हैं, बजरंगबली का पांव पखारने के लिए गंगा का आना सर्वमंगल के लिए शुभ और सुखद और गुरुपूर्णिमा के दुर्लभ संयोग के कारण मंगलकारी भी। वह जितनी बार आएंगी, शुभता बढ़ती ही जाएगी। शहर, समाज और राष्ट्र के लिए आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक रूप से यह संकेत सुखदायी है।