रविवार सुबह आठ से रात आठ बजे तक गंगा-यमुना के जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। शाम चार बजे फाफामऊ में गंगा 81.96 मीटर और रात आठ बजे 82.16 मीटर पहुंच गई। वहीं, नैनी में यमुना का जलस्तर 81.53 मीटर से बढ़कर 82.02 मीटर हो गया।
गंगा-यमुना के लगातार बढ़ते जलस्तर ने जिले में बाढ़ की चिंता बढ़ा दी है। रविवार को दोनों नदियों का पानी तेजी से बढ़ता रहा। रात आठ बजे तक फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 82.16 मीटर और नैनी में यमुना 82.02 मीटर पहुंच गई। खतरे का निशान 84.734 मीटर और चेतावनी बिंदु 83.73 मीटर है। गंगा चेतावनी बिंदु से महज 1.57 मीटर और यमुना 1.71 मीटर नीचे है।
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सुबह आठ से रात आठ बजे तक गंगा-यमुना के जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। शाम चार बजे फाफामऊ में गंगा 81.96 मीटर और रात आठ बजे 82.16 मीटर पहुंच गई। वहीं, नैनी में यमुना का जलस्तर 81.53 मीटर से बढ़कर 82.02 मीटर हो गया।
छतनाग में गंगा 81.59 मीटर और एसटीपी बक्शी बांध पर जलस्तर 82.11 मीटर दर्ज किया गया। प्रशासन ने निचले इलाकों और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क करना शुरू कर दिया है। मुनादी कराकर अलर्ट किया जा रहा है। लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने और नदी के बढ़ते पानी से दूरी बनाए रखने की अपील की गई है।
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दूर-दराज के कैचमेंट का भी असर
यमुना के बढ़ते जलस्तर के पीछे केवल प्रयागराज और आसपास की बारिश जिम्मेदार नहीं है। मध्य प्रदेश के विंध्य और बुंदेलखंड क्षेत्र में हुई भारी बारिश का पानी विभिन्न सहायक नदियों के जरिये यमुना में पहुंचता है। चंबल, सिंध, बेतवा और केन यमुना की प्रमुख सहायक नदियां हैं और इनके जलग्रहण क्षेत्र का बारिश का पानी आगे यमुना के प्रवाह को बढ़ा रहा है।
चित्रकूट की मंदाकिनी भी महत्वपूर्ण कड़ी
चित्रकूट में इस समय उफान पर चल रही मंदाकिनी नदी का पानी भी यमुना में जाता है। मंदाकिनी का उद्गम मध्य प्रदेश के सतना जिले में होता है। यह चित्रकूट से होकर बहती हुई राजापुर क्षेत्र में यमुना में मिलती है।