इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि फर्टिलाइजर (कंट्रोल) ऑर्डर-1985 के तहत डीएम को खाद के वितरण की निगरानी करने वाली अथॉरिटी के रूप में काम करने का अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने मिर्जापुर की मड़िहान एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
याचिकाकर्ता ने 100 टन डीएपी की मांग की थी, लेकिन उसे केवल 45 टन उपलब्ध कराई गई। खरीफ सीजन में खाद की कमी से फसल प्रभावित होने की आशंका जताते हुए कंपनी ने हाईकोर्ट से पर्याप्त आपूर्ति कराने की मांग की।
मामले में मिर्जापुर के डीएम ने व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर स्वीकार किया कि फर्टिलाइजर कंट्रोल ऑर्डर के तहत उन्हें खाद वितरण की निगरानी या कृषि उपनिदेशक को इस संबंध में निर्देश देने का अधिकार नहीं है। हालांकि, उन्होंने बताया कि कृषि विभाग के प्रधान सचिव के प्रशासनिक निर्देशों के तहत डीएम की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति बनाई गई है।
कोर्ट ने 10 मार्च और 23 जुलाई 2026 के इन पत्रों को प्रथम दृष्टया कानूनी अधिकार के बगैर जारी माना। कोर्ट ने कृषि उपनिदेशक और जिला कृषि अधिकारी को आदेश दिया कि पहले से दी गई मात्रा घटाकर शेष डीएपी की आपूर्ति करें या कारण स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करें।