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एसआरएन में युवती से गैंगरेप प्रकरण: दिन में आरोपी मेडिकल स्टाफ के नाम नहीं पता कर सकी पुलिस

Sat, 12 Jun 2021 12:36 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • मामले में विवेचना लंबित, उठ रहे सवाल
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गैंगरेप
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विस्तार
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एसआरएन अस्पताल में महिला मरीज से दुष्कर्म से आरोप मामले की जांच फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकी है। रिपोर्ट दर्ज होने के चार दिन बाद भी पुलिस अब तक कथित घटना के वक्त ड्यूटी पर तैनात स्टाफ का नाम नहीं पता कर सकी है। इससे लोगों के बीच तरह तरह के सवाल उठ रहे हैं। कोतवाली पुलिस का कहना है कि स्टाफ की जानकारी मांगी गई है, लेकिन एसआरएन प्रबंधन ने नाम नहीं उपलब्ध कराए हैं। उधर एसआरएन अफसरों का कहना है कि नाम ही नहीं, बल्कि पूरी जांच रिपोर्ट पुलिस को उपलब्ध करा दी गई है। 

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एसआरएन में भर्ती महिला मरीज के भाई ने बहन के साथ दुष्कर्म का आरोप लगाया था। आठ जून को इलाज के दौरान युवती की मौत हो गई थी, जिसके बाद आननफनन रिपोर्ट दर्ज की गई। हालांकि मामले की विवेचना को लेकर पुलिस गंभीर नहीं दिखाई दे रही है। हाल यह है कि चार दिन बीतने के बाद भी पुलिस अब तक ऑपरेशन के दौरान ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा स्टाफ का नाम तक नहीं पता कर पाई है। ऐसे में उनका बयान भी नहीं दर्ज किया जा सका है। गौरतलब है कि सबसे पहले पीड़ित व आरोपी पक्ष का बयान दर्ज किया जाना चाहिए।
 

इसमें पीड़ित पक्ष का बयान तो दर्ज हो चुका है, लेकिन आरोपी पक्ष का बयान नहीं लिया जा सका। आरोपियों के बयान दर्ज करने के बाद ही विवेचना आगे बढ़ सकेगी। कोतवाली पुलिस का कहना है कि स्टाफ के बारे में जानकारी मांगी गई थी, लेकिन अब तक एसआरएन प्रबंधन की ओर से इसे उपलब्ध नहीं कराया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि एसआरएन के एसआईसी डॉ. अजय सक्सेना का कहना है कि चिकित्सा स्टाफ का नाम ही नहीं बल्कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से कराई गई जांच संबंधी विस्तृत रिपोर्ट ही पुलिस को दे दी गई है। 

 

रिचा ने राज्यपाल को पत्र भेजा, उच्चस्तरीय जांच की मांग

प्रयागराज। एसआरएन मामले में सपा नेता रिचा सिंह ने राज्यपाल को पत्र भेजकर मामले में  उच्चस्तरीय जांच की मांग की। इसमें कहा गया है कि दुष्कर्म मामले में फोरेंसिक जांच के लिए एसओपी निर्धारित है। इसके तहत सूचना मिलते तुरंत रिपोर्ट दर्ज करना, पीड़िता की पहचान गुप्त रखना, महिला पुलिस अधिकारी की ओर से पीड़िता का बयान दर्ज करना, संभव हो तो महिला मजिस्ट्रेट के समक्ष 164 का बयान कराना, 24 घंटे के भीतर मेडिकल कराना आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। लेकिन इस केस में रिपोर्ट ही आठवें दिन दर्ज हुई। ऐसे में अब फोरेंसिक जांच औचित्यहीन है।

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इससे पहले डीजीपी के सर्कुलर का हवाला देकर आईजी, सीएमओ को पत्र भेजकर सवाल उठाए थे। पूछा था कि  सर्कुलर के हिसाब से ऐसे मामलों में जांच के लिए अधिकतम समय सीमा सात दिन है तो आठवें दिन रिपोर्ट दर्ज होने पर जांच कैसे होगी। पीड़िता के कपड़े व उसके आंतरिक अंगों व शरीर पर मिले घावों के सैंपल जांच के लिए भेजने, धारा 532(2ए) सीआरपीसी के तहत आरोपियों की मेडिकल जांच व डीएनए प्रोफाइलिंग और आईजी व सीएमओ की तथाकथित जांच के दौरान एसओपी  फॉलो नहीं करने को लेकर भी सवाल उठाए थे।

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