सार
एम.पी.वी.एम. गंगा गुरुकुलम में गांधी-शास्त्री जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। विद्यार्थियों ने रचनात्मक गतिविधियों, भाषण, गीत, नाटक और समूह नृत्य के जरिए गांधीजी व शास्त्रीजी के विचारों और आदर्शों को प्रस्तुत किया।
महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर में गांधी और शास्त्री जयंती मनाई गई।
- फोटो : अमर उजाला।
एमपीवीएम गंगा गुरुकुलम विद्यालय में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती श्रद्धा, उल्लास और उत्साह के साथ मनाई गई। गांधीजी के ‘करो या मरो’ तथा शास्त्रीजी के ‘जय जवान, जय किसान’ जैसे प्रेरणादायी नारों को स्मरण करते हुए विद्यालय में राष्ट्रीय एकता, स्वच्छता, अहिंसा और देशभक्ति की भावना से ओत-प्रोत विभिन्न गतिविधियों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या माधुरी श्रीवास्तव एवं अन्य शिक्षिकाओं ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्रों पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। इस अवसर पर कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों ने दोनों महान नेताओं के जीवन, आदर्शों एवं विचारों को विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से प्रस्तुत किया।
कक्षा एक और दो के विद्यार्थियों ने स्वच्छता एवं कूड़ेदान से संबंधित मॉडल प्रस्तुत किए। कक्षा तीन के विद्यार्थियों ने गांधीजी के तीन बंदरों का मॉडल बनाकर ‘बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो और बुरा मत बोलो’ का संदेश दिया। कक्षा चार के विद्यार्थियों ने ‘गांधीजी का स्वच्छता चश्मा’ प्रस्तुत किया, जबकि कक्षा पांच के विद्यार्थियों ने अहिंसा एवं शांति के प्रतीक श्वेत कबूतर बनाकर अपने विचारों को रचनात्मक रूप दिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में कक्षा नौ की छात्रा आभ्या गुप्ता ने महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री के आदर्शों, सिद्धांतों और विचारों पर भाषण प्रस्तुत किया। इसके बाद कक्षा छह से नौ तक के विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से प्रेरणात्मक गीत प्रस्तुत किया। कक्षा 11 के विद्यार्थियों ने लाल बहादुर शास्त्री के जीवन पर आधारित प्रेरणात्मक लघु नाटक प्रस्तुत किया। वहीं, कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों ने समूह नृत्य प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर प्रधानाचार्या माधुरी श्रीवास्तव ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के विचार आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को सत्य, ईमानदारी, अनुशासन, सादगी, स्वच्छता एवं अहिंसा जैसे मूल्यों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक रूप से गांधीजी की प्रिय रामधुन के साथ हुआ। आयोजन ने विद्यार्थियों में देशभक्ति, नैतिक मूल्यों, राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक दायित्व की भावना को मजबूत किया।