इसके अलावा सदर बाजार की सब्जी मंडी में 110 और यमुना तट सरस्वती घाट पर 19 दुकानों को मिलाकर इस योजना के तहत अब तक कुल 368 दुकानें बनाकर आवंटित की गई हैं। इसमें ज्यादातर लाभार्थियों का मुद्रा योजना के तहत लोन कराया गया है। करोड़ों रुपये की इस रोजगार सृजन योजना में नियमों की अनदेखी किस तरह सफाई से की गई, इस पर भी नजर डालिए। टेंडर के नाम पर 19 जनवरी 2023 को अभिरुचि की सूचना का प्रकाशन सिर्फ एक अखबार में किया गया। इसमें दुकानों के निर्माण और उनकी लागत का भी जिक्र नहीं था।
रक्षा मंत्रालय से की गई है शिकायत
इतनी बड़ी संख्या में दुकानों के निर्माण के कुल बजट का भी उल्लेख नहीं किया गया। इसमें बरेली, मेरठ की भी कंपनियों ने हिस्सा लिया, लेकिन टेंडर दिल्ली की किरन सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस को मिला। इस कंपनी के कर्मचारी ने छावनी के मैरिज हॉल में बैठकर अपने हस्ताक्षर से आवंटन पत्र जारी कर दिए। इस मामले की शिकायत रक्षा मंत्रालय से सामाजिक कार्यकर्ता दिवाकर नाथ त्रिपाठी ने की है। शिकायत में कहा है कि टेंडर प्रकाशन में पारदर्शिता नहीं बरती गई। निजी कंपनी ने फाइबर निर्मित दुकानों की कीमत लाखों रुपये वसूली है। यह रकम लाभार्थियों से छावनी बोर्ड के खाते में नहीं, बल्कि किरन सॉफ्टवेयर के खाते में जमा कराई गई।
31 अगस्त 2024 को ऑर्डिनरी बोर्ड मीटिंग में तीन सदस्यों की उपस्थिति में टाउन वेंडिंग कमेटी बनाकर पथ विक्रेता बाजार बसाने का प्रारूप रखा गया। इसमें 3.50 लाख रुपये में प्रति दुकान के आवंटन पर सहमति जताई गई। बैठक में यह भी कहा गया कि जिनके पास दुकानें खरीदने की क्षमता नहीं होगी, उन्हें प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत ऋण उपलब्ध कराया जाएगा।
लॉटरी सिस्टम से हुए आवंटन में नियमों का पालन किया गया है। जांच का सामना करने के लिए मैं तैयार हूं। - मोहम्मद समीर इस्लाम, सीईओ, छावनी बोर्ड
मैंने वही किया, जो छावनी बोर्ड ने कहा। निजी कंपनी के खाते में लाभार्थियों से रकम क्यों जमा कराई गई, छावनी बोर्ड के प्रपत्र पर निजी कंपनी की ओर से आवंटन पत्र कैसे जारी कर दिया गया, इन सवालों का जवाब छावनी बोर्ड से ही लेना चाहिए। - अभय कुमार, किरन सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस