सलोरी में रहने वाले प्रतियोगी छात्र मनीष कुमार यादव 20 ने शनिवार को फांसी लगाकर जान दे दी। दोपहर में लॉज में रहने वाले छात्रों को घटना की जानकारी हुई, जिनकी सूचना पर पुलिस पहुंच गई। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है लेकिन माना जा रहा है कि पढ़ाई के दबाव में मनीष ने यह कदम उठाया।
मनीष मूल रूप से गाजीपुर के मरदहा गांव का रहने वाला था। उसके पिता केदारनाथ यादव किसानी करते हैं। वह करीब दो साल से कर्नलगंज में सलोरी स्थित प्रजापति लॉज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। लॉज मेें रहने वाले अन्य छात्रों ने बताया कि सभी रोज सुबह टहलने जाते थे लेकिन शनिवार को मनीष आवाज देने के बाद भी कमरे से बाहर नहीं आया। बहुत देर तक दरवाजा नहीं खुलने पर छात्रों ने दरवाजे के उऊपर लगे रोशनदान से झांककर भीतर देखा तो वह फांसी पर लटका मिला।
सूचना पर पुलिस पहुंची और फिर दरवाजा तोड़कर शव को फंदे से नीचे उतारा गया। छात्र ने मफलर से बना फंदा पंखे में फंसाकर जान दी थी। पुलिस ने जांच पड़ताल की लेकिन मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। जिसके बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। सूचना पर परिजन भी आ गए। देर शाम पोस्टमार्टम के बाद वह शव लेकर रवाना हो गए। कर्नलगंज पुलिस ने बताया कि परिजन भी कोई वजह नहीं बता पा रहे हैं। अगल-बगल के छात्रों ने बताया है कि शुक्रवार रात मनीष उनसे मिला था और तब सबकुछ सामान्य था। इसके बाद सभी सोने चले गए।
17 दिन में चौथे प्रतियोगी ने चुना मौत का रास्ता
शहर में 17 दिन के भीतर प्रतियोगी छात्र-छात्राओं की खुदकुशी का यह चौथा मामला है। आठ फरवरी को ओमगायत्री नगर में रहने वाली सरोज चौरसिया ने फांसी लगाकर जान दे दी थी। फैजाबाद निवासी छात्रा रेलवे व अन्य परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी। इसी तरह 23 फरवरी को भी दो छात्रों ने खुदकुशी कर ली थी। इनमें सलोरी में मौसम यादव 21 ने फांसी लगाकर तो शिवकुटी में विजय उर्फ राजकुमार 27 ने ट्रेन के आगे कूदकर जिंदगी खत्म कर ली थी। मौसम पुत्र जीतनारायण यादव मूल रूप से वाराणसी के गद्दोजपुर जंसा का रहने वाला था। सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करेन के बाद वह जेईई की तैयारी करने शहर आया था। जबकि मूल रूप से फत्तेपुर नवाबगंज का रहने वाला राजकुमार उर्फ विजय पुत्र हरिश्चंद्र कटरा में रहता था।