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आज से रेती पर माह भर की ‘साधना’ शुरू

Tue, 02 Jan 2018 01:15 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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माघ मेले के पहले स्नानपर्व पौष पूर्णिमा पर पुण्य की कामना से मंगलवार को पहली डुबकी लगेगी और इसी के साथ माह भर के कल्पवास का अनुष्ठान भी आरंभ होगा। पुण्यकाल में संगम सहित गंगा के विभिन्न घाटों पर श्रद्धालु डुबकी लगाएंगे। वहीं तीर्थ पुरोहितों की देखरेख में कल्पवासी माह भर के कल्पवास का व्रत-संकल्प लेंगे। स्नान सहित दान, जप का अनुष्ठान शुरू हो जाएगा।
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तीर्थपुरोहितों एवं संत महात्माओं के शिविरों में सोमवार को देर रात तक श्रद्धालु पहुंचते रहे। शिविर के पुराने साथियों से मिले तो रास्ते की थकान पल भर में दूर हो गई। कल्पवासियों ने शिविर बसाने, कुटिया सजाने में एक दूसरे का सहयोग भी किया। मोरी मार्ग स्थित तीर्थपुरोहित आशुतोष पालीवाल निशान हरी मछली के शिविर में कल्पवास की तैयारियों में व्यस्त गोरखपुर से आईं विंध्यवासिनी ने कहा, गंगा मइया की कृपा से संगम की रेती पर एक बार फिर कल्पवास का अवसर मिला है। उनके पुत्र पीयूष कुमार मिश्र ने कहा मां कल्पवास करने आईं हैं तो हम उनकी सेवा के लिए आए हैं।

दस वर्ष से कल्पवास कर रही विमला देवी गुप्ता ने कहा, कल्पवास के पुण्य की कामना से आए हैं। माह भर रहकर पूरे वर्ष की ऊर्जा समेट कर लौटेंगे। यही कहना ओमप्रकाश गुप्ता, प्रेमनारायण चौबे का है। तीर्थपुरोहित अनूप त्रिपाठी निशान पीली कोठी के सेक्टर पांच जीटी रोड स्थित शिविर में श्रद्धालुओं ने मिलजुल कुटिया सजाई। जबलपुर से आए राधे श्याम लाटा का कहना है कि कल्पवास का नवां वर्ष है। त्रिवेणी स्नान की अनुभूति का आनंद अलौकिक है। विदिशा के लक्ष्मी शंकर शास्त्री ने कहा गंगा मइया के आशीर्वाद से संगम नगरी आने का मौका मिला है। उनकी कृपा से कल्पवास निर्विघ्न पूरा हो।
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कल्पवास के संकल्प के तहत शिविर के बाहर जौ बोने के साथ ही तुलसी का बिरवा भी रोपा जाएगा। केले का पौधा भी कई कल्पवासी अपने घरे से लेकर आएं हैं। प्रयाग के नगर देवता भगवान माधव का ध्यान करके प्रतिदिन उसमें जल चढ़ाऐंगे। कल्पवासी सुबह गंगा स्नान और अन्नदान करने के बाद ही अन्न-जल ग्रहण करेंगे। इस दौरान भूमि शयन के साथ एक वक्त ही भोजन किया जाएगा। तंबुओं के शहर में भजन, प्रवचन, कीर्तन, भागवत, रासलीला आदि के कार्यक्रम भी आरंभ होंगे।

पौष पूर्णिमा से कल्पवास का संकल्प लेने वाले श्रद्धालुओं का जप, तप, स्नान के साथ षटतिला का अनुशासन भी शुरू होगा। मासपर्यंत तिल का प्रयोग किया जाएगा। तिलयुक्त जल से स्नान, तिल से तर्पण, उबटन, हवन, यहां तक कि भोजन में भी तिल का अधिक से अधिक प्रयोग किया जाएगा। आचार्य विद्याकांत पांडेय के मुताबिक माघ मास के दौरान शिव मंदिर में तिल के तेल का दीया जलाना पुण्यदायी है।

पौष पूर्णिमा स्नान से पहले शिविर की साजसज्जा में साधु-संत देर रात तक लगे रहे। सबकी यही कोशिश थी कि शिविर में सभी जरूरी सुविधाएं पूरी हो जाएं। बड़े शिविरों में संतों की उपस्थिति के साथ श्रद्धालुओं का आना भी लगा रहा। स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती के शिविर को अंतिम रूप दिया गया। शिविर प्रभारी आचार्य छोटे लाल की देखरेख में शिविर को सजाया गया। प्रवक्ता ओंकार नाथ त्रिपाठी के मुताबिक स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती चार जनवरी को शिविर प्रवेश करेंगे।

पौष पूर्णिमा तिथि का संचरण सोमवार को दिन में 11:08 बजे होगा जो मंगलवार सुबह 8.47 बजे तक रहेगा। इसके बाद माघ मास की प्रतिपदा आरंभ हो जाएगी। अखिल भारतीय ज्योतिष परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री अविनाश राय के मुताबिक मंगलवार को स्नान, दान और कल्पवास का संकल्प लिया जाएगा। स्नान का मुहूर्त पूरे दिन रहेगा। स्नान का सर्वोत्तम मुहूर्त सुबह  5:46 बजे से 7:46 बजे तक है।
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