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बेंच मुद्दे पर सफाई देने से मुकरे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष

Sun, 12 Jun 2016 02:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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भाजपा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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हाईकोर्ट बेंच विभाजन के मुद्दे पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बयान से पैदा हुए विवाद का शनिवार को भी कोई समाधान नहीं निकल सका। अब इस मुद्दे पर रार बढ़ने की उम्मीद है। वकीलों के एक प्रतिनिधि मंडल ने पूर्व महासचिव प्रभाशंकर मिश्र की अगुआई में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य का घेराव किया। अधिवक्ता उनसे राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान पर स्पष्टीकरण की मांग कर रहे थे, मगर मौर्य ने दो टूक कह दिया कि बिना अमित शाह से वार्ता किए वह कोई बयान देने की स्थिति में नहीं हैं। केशव प्रसाद ने वकीलों को भरोसा दिलाया है अमित शाह से वार्ता करके शीघ्र ही वह अवगत कराएंगे।
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अधिवक्ता इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष को 24 घंटे की मोहलत दी है, वरना सोमवार को इस मुद्दे पर गिरफ्तारी दी जाएगी। अधिवक्ताओं का प्रतिनिधि मंडल आज दिन में करीब 12 बजे प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के आवास पर पहुंचकर उनसे मिला। अधिवक्ताओं से हुई वार्ता में मौर्य ने कहा कि चूंकि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने इस मुद्दे पर बयान दिया है, इसलिए उनसे बात करने के बाद ही कोई स्पष्टीकरण दिया जा सकता है। अधिवक्ता इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। प्रभाशंकर मिश्र ने बताया कि यदि चौबीस घंटे में कोई स्पष्टीकरण नहीं मिलता है तो सोमवार को अधिवक्ता इस मुद्दे पर गिरफ्तारी देंगे।

प्रतिनिधि मंडल में पूर्व महासचिव अनिल तिवारी, बार के उपाध्यक्ष सिपाहीलाल शुक्ला, पूर्व कार्यकारिणी सदस्य अजय कुमार मिश्र, अभिषेक मिश्र, पूर्व उपाध्यक्ष प्रमोद सिंह, शैलेंद्र द्विवेदी, जमील अहमद, बैजंत मिश्र, उदय शंकर तिवारी, पंकज उपाध्याय, नवीन शुक्ला और राजीव पांडेय आदि शामिल थे।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को हाईकोर्ट में बार एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे। हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष राधाकांत ओझा ने बताया कि प्रधानमंत्री का 20 मिनट का कार्यक्रम संशोधित कर दिया गया है। पहले उनको सिर्फ जजों से मुलाकात करना था, मगर अब बार प्रतिनिधियों को भी मुलाकात का समय दिया गया है। मुलाकात लगभग 20 मिनट की हो सकती है। हाईकोर्ट के महानिबंधक ने यह जानकारी अध्यक्ष आरके ओझा दी है। श्री ओझा ने बताया कि प्रधानमंत्री से मुलाकात में बेंच सहित अधिवक्ता हित और हाईकोर्ट से जुड़े सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में शामिल होने के दौरान हाईकोर्ट के 150वें स्थापना दिवस समारोह के उपलक्ष्य में हाईकोर्ट भी जाएंगे। वहां वह जजों से मुलाकात करेंगे इसी दौरान बार के प्रतिनिधियों से भी भेंट करने का कार्यक्रम है।

हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने बेंच मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण मांगा है। अमित शाह के बयान के बाद उत्पन्न स्थिति पर बार कार्यकारिणी ने शनिवार को एक आपात बैठक कर बयान की निंदा की है। कहा गया कि बार एसोसिएशन भाजपा अध्यक्ष के बेंच विभाजन को लेकर दिए गए बयान की भर्त्सना करती है। मांग की गई है कि यदि उनके बयान का स्पष्टीकरण नहीं दिया जाता है तो अधिवक्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शहर आगमन का विरोध करता है।  बैठक का संचालन महासचिव अशोक कुमार सिंह ने किया।

बार एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री से अनुरोध भी किया है कि वह बार के पदाधिकारियों को मुलाकात का समय दें तथा बेंच विभाजन पर भविष्य में कभी भी नहीं करने का आश्वासन दें। बार ने कहा है कि यदि अमित शाह के बयान का खंडन नहीं किया जाता है तो भाजपा के मिशन 2017 को सफल नहीं होने दिया जाएगा। कार्यकारिणी की बैठक में सुनील कुमार सिंह, आनंद मोहन पांडेय, बृजेंद्र कुमार पांडेय, रुचिर श्रीवास्तव, सुधीर कुमार चंद्रौल, रणविजय सिंह, राजीव शुक्ला, विवेक मिश्र, अजय कुमार मिश्र, गोविंद नारायण तिवारी, आशीष कुमार, विजय द्विवेदी, अमित श्रीवास्तव, दिनेश वरुण, आनंद शंकर दुबे, कृष्ण मनोहर तिवारी, इंदु भूषण त्रिपाठी आदि मौजूद थे।


हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजेश खरे ने दावा किया है कि भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट की बेंच को लेकर कोई मुद्दा शामिल नहीं है। राजेश खरे ने भाजपा महासचिव भूपेंद्र यादव के हवाले से यह दावा किया है। उनका कहना है कि भूपेंद्र यादव से मुलाकात पर अमित शाह के बयान के बाबत उनसे वार्ता की तो उन्होंने बताया कि पार्टी अध्यक्ष का बयान किसी राजनीतिक दबाव की वजह से हो सकता है, मगर कार्यकारिणी की बैठक में ऐसे किसी प्रस्ताव को शामिल नहीं किया गया है।

बार कौंसिल ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व महाधिवक्ता वीसी मिश्र ने कहा है कि हाईकोर्ट की बेंच के गठन को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। यह एक संवैधानिक विषय है इसका हल कानून के भीतर ही रहकर निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक व्यवस्था बेंच के गठन की इजाजत नहीं देती है।

अनुच्छेद 214 में एक राज्य में एक हाईकोर्ट की व्यवस्था है। इस मामले में लखनऊ खंडपीठ की स्थिति अलग है। लखनऊ खंडपीठ राज्य के पुनर्गठन के फलस्वरूप अस्तित्व में आया है। इसकी स्थापना खंडपीठ के तौर पर ही की गई है। इसी प्रकार से अन्य राज्यों में खंडपीठें राज्य पुनर्गठन के कारण ही अस्तित्व में आई हैं। यदि हाईकोर्ट की अलग पीठ बनाने का प्रयास किया जाएगा तो कल को प्रत्येक राज्य में सुप्रीम कोर्ट की बेंच बनाने की भी मांग उठेगी, जबकि स्थिति यह है कि संविधान के अनुसार देश का एक ही सुप्रीमकोर्ट होगा।
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