डीजल की बढ़ती कीमतों ने ट्रांसपोर्ट व्यवसाय की कमर तोड़ दी है। किराये में 20 फीसदी वृद्धि के बाद अब ट्रांसपोर्टरों को बुकिंग कम मिल रही है। कारोबार करीब 40 फीसदी गिरा है। बुकिंग न मिलने से अंदावा, डांडी, ट्रांसपोर्ट नगर, बमरौली और फाफामऊ जैसे इलाकों में 600 से अधिक ट्रक खड़े हो गए हैं।
ट्रांसपोर्ट के कारोबार में आई मंदी की जद में वाराणसी, कानपुर, लखनऊ और आगरा भी शामिल हैं। पिछले दिनों ही प्रयागराज गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ट्रस्ट समेत कई संगठनों ने 20 फीसदी तक मालभाड़ा बढ़ाया। मालभाड़ा बढ़ने पर कई व्यापारियों ने बुकिंग कराने से इन्कार कर दिया है।
कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र गोयल ने कहा, कच्चे माल की लागत पहले से ही आसमान छू रही है और वे अपने उत्पादों की एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) तुरंत नहीं बढ़ा सकते। ऐसे में मालभाड़ा बढ़ने से स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। इस गतिरोध को दूर करने के लिए लगातार ट्रांसपोर्टरों के साथ बातचीत की जा रही है।
माल डंप करने की नीति अपना रहे व्यापारी
इस संकट का सबसे बड़ा असर उन वस्तुओं पर पड़ा है जो जल्दी खराब नहीं होती हैं। कुछ व्यापारियों ने अब माल डंप करने की नीति अपना ली है। साड़ी, फर्नीचर और प्लास्टिक की वस्तुओं की आवाजाही पर इसका बड़ा असर पड़ा है।
वहीं, दवा और खाद्य पदार्थ जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाली कंपनियों ने अभी तक अपने उत्पादों के दाम तो नहीं बढ़ाए हैं। वह बढ़े हुए भाड़े पर ही माल भेज रही हैं। जानकारों के मुताबिक, अगर डीजल और मालभाड़े की यही स्थिति रही तो जरूरी चीजों की कीमतें बढ़ सकती हैं।
ट्रांसपोर्ट कारोबार की गति धीमी हो गई है। बीते कुछ दिनों के दौरान कारोबार में 30 से 40 फीसदी की गिरावट हुई है। - अनिल चौरसिया उर्फ मुन्नन भाई
आवश्यक वस्तुओं की ही आपूर्ति हो रही है। अन्य उत्पादों की आवाजाही कारोबारियों ने बेहद सीमित कर दी है। समझ में ही नहीं आ रहा है कि क्या किया जाए। - परमानंद त्रिपाठी (सोटा स्वामी )
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बीते कुछ वर्षों के दौरान ट्रांसपोर्ट कारोबार में पहली बार इस तरह की गिरावट देखी गई है। अधिकांश ट्रांसपोर्टर परेशान है। पता नहीं हमें कब राहत मिलेगी। - तुफैल अहमद चंपू
परमानंद त्रिपाठी- फोटो : Archive
परमानंद त्रिपाठी- फोटो : Archive