मानसून के दौरान आसमान से गिरने वाली बिजली अब रेलवे की रफ्तार में रोड़ा नहीं बनेगी। बिजली गिरने से ओएचई (ओवरहेड इक्विपमेंट) लाइन ट्रिप हो जाती थी और ट्रेनें कहीं भी खड़ी हो जाती थीं। अब रेलवे इस समस्या का स्थायी समाधान करने जा रहा है। उत्तर मध्य रेलवे समेत सभी जोनल रेलवे डिस्कनेक्टर असेंबली प्रणाली को लागू करने जा रहे हैं।
यह आधुनिक सिस्टम बिजली गिरने पर खराब हुए लाइटनिंग अरेस्टर उपकरण को पलक झपकते ही मुख्य चालू लाइन से अलग कर देगा। इससे पूरी बिजली लाइन ट्रिप नहीं होगी और न ही सब-स्टेशनों को कोई नुकसान पहुंचेगा। इससे ट्रेनों का परिचालन निर्बाध रूप से जारी रहेगा।
पहले लाइटनिंग अरेस्टर के पंक्चर होने पर कई किलोमीटर तक बिजली गुल हो जाती थी। ट्रेनें रुक जाती थीं। रेलवे अब उपकरणों की तकनीकी खराबी को पकड़ने के लिए पहली बार अत्याधुनिक थर्मोविजन कैमरा तकनीक को अनिवार्य करने जा रहा है।
इस थर्मल इमेजिंग कैमरे के जरिये बिजली सब-स्टेशनों की नियमित जांच की जाएगी ताकि कोई भी उपकरण पूरी तरह खराब होने या जलने से पहले ही चिह्नित कर बदला जा सके।