डॉ. अनिल कुमार के मुताबिक शंसमनी बटी का मुख्य घटक गिलोय है, जिसके नियमित उपयोग से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। बुखार में भी यह दवा कारगर है। आयुष क्वाथ में तुलसी, दालचीनी, सोंठ, काली मिर्च का सही अनुपात में मिश्रण है, जो काढ़े के रूप में लिया जा सकता है। इसी तरह आयुष 64 में चिरायता, लताकरंज आदि घटक हैं, जो सभी प्रकार के ज्वर और लिवर संक्रमण को रोकने में सहायक हैं। अणु तेल नाक में डालने और गरारा करने में
प्रयुक्त करने की सलाह दी जाती है। उन्होंने बताया कि शहरी तथा ग्रामीण केंद्रों पर दवाएं नि:शुल्क उपलब्ध हैं। गांवों में घर-घर वितरण किया जा रहा है।