एप का खुद करते थे संचालन
आरोपी लोगों से मिलकर डिजिटल करेंसी में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करते थे। निवेश में कई गुना का लाभ देकर उन्हें ठगी के जंजाल में फंसाते थे। डेफ्टर लेजर अकाउंटिंग नाम से बने एप का संचालन खुद किया करते थे। पुलिस को शक है कि गिरोह में और भी लोग शामिल है। पुलिस अफसरों का कहना है कि जल्द ही मामले में और भी गिरफ्तारियां होंगी।
ट्रू कॉलर पर सीबीआई का नंबर सेव
जालसाज अपने मोबाइल नंबर को ट्रू कॉलर पर सीबीआई नाम से सेव किया था। ऐसे में जब कभी जालसाज किसी को डराने के लिए फोन करते थे तो अगले के मोबाइल पर सीबीआई के नाम से जाता था। लोगों को लगता था कि सीबीआई की तरफ से उनके पास फोन आया है। जिससे डरकर वह इन आरोपियों को पैसे ट्रांसफर कर देते थे। इन लोगों ने किन-किन लोगों से ठगी की है, पुलिस इसकी पड़ताल में जुटी हुई है।
साइबर पुलिस को 20 हजार का इनाम
दरियाबाद में रहने वाले संदीप ने अपना आधार दिल्ली, पहाड़गंज रामगली स्वामी राम तीर्थ नगर, हरीराम कन्ना का बनवाया था। उस पर अतरसुइया, शाहगंज और खुल्दाबाद थाने में ठगी के तीन मुकदमे एक लड़ाई-झगड़ा व धमकी का एक मुकदमा खुल्दाबाद थाने में दर्ज है। डीसीपी दीपक भूकर ने बताया कि जालसाजों की गिरफ्तारी पर साइबर थाना पुलिस को 20 हजार रुपये इनाम दिया जाएगा।
पैसा निवेश करने के बाद ऐसा डराते थे
- सीबीआई अफसर बनकर
- एडिशनल डायरेक्टर बनकर टैक्स जमा करना
- पेनाल्टी भरने के नाम पर डराना
- एनओसी के नाम पैसा जमा करवाना
- एजेंसियों के सम्मन के नाम पर
- नोटिस भेजकर जेल जाने का डर दिखाना