ऐसे बनाते थे शिकार
साइबर थाना पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि वह सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के डाटा को ऑनलाइन प्राप्त कर लेते हैं। खास तौर से पुलिसकर्मियों का विवरण पीएनओ के जरिए जुटा लेते हैं। इसके बाद ट्रेजरी अधिकारी बनकर उन्हें फोन करते हैं। वह जिस नंबर से फोन करते हैं, वह ट्रू कॉलर एप में ट्रेजरी अफसर के से अपडेट करते हैं जिससे लोग उनके झांसे में आ जाएं। फिर संबंधित को उसकी नौकरी से संबंधित जानकारी जैसे नियुक्ति जनपद, भर्ती दिनांक, रिटायरमेंट आदि बताकर विश्वास में ले लेते हैं। फिर ऑनलाइन सत्यापन के नाम पर लिंक भेजकर धोखे से रिमोट एप डाउनलोड करा देते हैं और फोन का एक्सेस पाकर नेटबैंकिंग या पेमेंट एप के जरिए खाते से रकम उड़ा देते हैं।
यह हुए गिरफ्तार
1. अब्दुल मतीन उर्फ मार्टीन दा पुत्र हारून मियां (सरगना) निवासी बारा, थाना सारठ, जिला देवघर, झारखंड
2. अंकित अग्रवाल पुत्र मिर्धा अग्रवाल निवासी 46 अलीगोल महल सदर बाजार, बैरकपुर, जिला नार्थ 24 परगना, पश्चिम बंगाल
3. बसारत अंसारी पुत्र मो सपतली मियां निवासी ग्राम संधाली सिमरा पो. सिरसा जामुनी, जिला देवघर, झारखंड
4. एस. के जीशान हुसैन पुत्र एस के जाकिर हुसैन निवासी 2/ एच 2 न्यू टेंगरा रोड़ गोविंदा खटीक रोड़ सर्कस एवेन्यू, कोलकाता पश्चिम बंगाल
5. विजय प्रसाद पुत्र मोतीलाल प्रसाद नि0 7/1 मिया जाने लेन गोविंदा खटीक रोड सर्कस एवेन्यू कोलकाता, पश्चिम बंगाल।
बरामदगी का विवरण-
नौ मोबाइल, 15 एटीएम कार्ड, 11 प्री एक्टिवेटेड सिम व स्मार्ट वाच
सबकी अलग-अलग तय थी जिम्मेदारी
गिरफ्तार अंकित व जीशान एटीएम कार्ड व प्री एक्टिवेटेड सिम का इंतजाम करता था। उसने पूछताछ में बताया है कि पश्चिम बंगाल में बहुत से लोग खाते खुलवाकर 15-20 हजार में इसे बेच देते हैं। इन्हीं खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी में गिरोह के अन्य सदस्य करते हैं। किसी व्यक्ति के खाते से उड़ाई गई रकम इन्हीं खातों में ट्रांसफर कर ली जाती है। जिसे एटीएम कार्ड के जरिए दोनों निकाल लेते थे।