‘अमर उजाला फाउंडेशन’, ‘भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम’ (एलिम्को) और एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज (एबीआईसी) की ओर से 22 मार्च को ‘सबसे बड़े नि:शक्तजन सहायता शिविर’ का आयोजन किया जाएगा। इससे पहले बृहस्पतिवार को स्टेनली रोड पर बेली अस्पताल परिसर के बगल में सीएमओ दफ्तर में सुबह दस बजे से नि:शक्तता (विकलांगता) प्रमाणपत्र बनवाने के लिए चौथा कैंप लगेगा जो दोपहर तक चलेगा। अब तक जिन नि:शक्तजनों के प्रमाणपत्र नहीं बने हैं, वे इस केैंप में आकर प्रमाणपत्र बनवा सकते हैं।
इसके लिए अब तक तीन शिविर लग चुके हैं, जिसमें कुल 1745 नि:शक्तजनों ने रजिस्ट्रेशन कराए। इसमें से 379 को मौके पर ही प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए। चौथे शिविर में बोर्ड के सदस्य नि:शक्तजनों और दस्तावेजों की जांच-पड़ताल करेंगे। जिनकी विकलांगता स्पष्ट दिखेगी, उनके प्रमाणपत्र उसी दिन बन जाएंगे और जिनको नि:शक्तता से संबंधित जांच की जरूरत पड़ेगी, उन्हें जांच कराने के लिए मनोहर दास नेत्र चिकित्सालय (एमडीआई), स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय के मानसिक रोग विभाग और नाक, कान, गला विभाग रेफर किया जाएगा। विभागों से जांच रिपोर्ट लाने पर 22 मार्च को कमला नेहरू रोड पर बिजली घर के सामने स्थित एंग्लो बंगाली इंटर कॉलेज में मुख्य शिविर में उनके प्रमाणपत्र बनाए जाएंगे। यहां पर नि:शक्तजनों को एक ही छत के नीचे वे सभी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी, जिसके वे हकदार हैं।
मुख्य शिविर में एलिम्को की टीम नि:शक्तजनों का मेजरमेंट एवं उनका रजिस्ट्रेशन करेगी। चयनित नि:शक्तजनों को अलग से आयोजित शिविर में ट्राई साइकिल, बैसाखी, व्हील चेयर, कान की मशीन जैसे उपकरण दिए जाएंगे। वितरण की तिथि बाद में घोषित की जाएगी। 22 मार्च को ही नारायण सेवा संस्थान की टीम उन सभी नि:शक्तजनों की जांच करेगी, जिन्हें ऑपरेशन की जरूरत है। जांच के आधार पर ऑपरेशन की तिथि तय की जाएगी जिस पर नि:शक्तजनों को बुलाया जाएगा। इसके अलावा शिविर में विकलांग ट्रेनिंग ऐंड रिहैबिलेशन सेंटर की टीम भी आएगी, जो नि:शक्तजनों का रजिस्ट्रेशन करेगी और मौका आने पर उन्हें पुनर्वास एवं रोजगार की सुविधा मुहैया कराएगी। शिविर में जिला विकलांग कल्याण विभाग सहित अन्य विभागों की टीमें भी मौजूद रहेंगी, जो अपने स्तर पर नि:शक्तजनों को सुविधाएं मुहैया कराएंगी। हालांकि सभी प्रकार की सुविधाएं उन्हीं नि:शक्तजनों को मिलेंगी, जिनके पास विकलांगता प्रमाणपत्र होंगे।