ऐसे में निदेशालय की ओर से फिर से जांच का आदेश दिया गया है। फर्जी विश्वविद्यालय अब भी चल रहा है या नहीं, कौन-कौन सी डिग्री बांटता है, इनके खिलाफ कार्रवाई क्या हुई है आदि बिंदुओं पर जांच कर निदेशालय ने बुधवार तक रिपोर्ट मांगी है। विस्तृत जांच रिपोर्ट को निदेशालय की ओर से 27 नवंबर तक शासन को सौंपना है।
सहायक निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने कहा कि इन विश्वविद्यालयों की डिग्रियां पूरी तरह से फर्जी हैं। इन डिग्रियों से छात्रों को न तो नौकरी मिलेगी और न ही आगे की पढ़ाई कर सकेंगे। बताया कि निदेशालय की ओर से क्षेत्रीय अधिकारियों को इनकी जांच सौंपी गई है। प्रयागराज में सांख्यिकी शोध अधिकारी डॉ. पंकज सिंह को जांच दी गई है।
डॉ. बीएल शर्मा ने बताया कि प्रयागराज स्थित फर्जी विश्वविद्यालय के बारे में पता लगाने की कोशिश की गई लेकिन वह कहीं नहीं मिला। यूजीसी की ओर से जारी सूची में भी इस विश्वविद्यालय का पता नहीं दिया गया है। ऐसे में माना जा रहा है कि वेबसाइट पर ही यह विश्वविद्यालय संचालित हो रहा है। उन्होंने बताया कि 27 नवंबर तक शासन को पूरी रिपोर्ट भेज दी जाएगी। शासन के निर्देश पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
नोएडा में विवि के नाम पर आती है डाक लेकिन पता नहीं
नोएडा में महामाया तकनीकी विश्वविद्यालय के नाम से खुले फर्जी विश्वविद्यालय का पता भी गलत है। जांच समिति के सदस्यों ने दिए गए पते पर संपर्क करने की कोशिश की लेकिन वह मिला ही नहीं। इसके बाद डाक विभाग में संपर्क किया गया। वहां से बताया गया कि इस फर्जी विश्वविद्यालय के नाम पर लगातार डाक आती है लेकिन फर्जी पता कहकर उन्हें वापस कर दिया जाता है।