हिम्मतगंज में खतरनाक घोषित किए गए चार मकानों को रेलवे की क्रेन भी नहीं तोड़ पाई। शनिवार देर रात चारों भवनों को जमींदोज करने की कार्रवाई शुरू की गई। तीन घंटे की मशक्कत के बाद क्रेन से एक मकान के ऊपरी मंजिल पर पानी की टंकी और उसका कुछ हिस्सा ही तोड़ा जा सका। आधी रात कार्रवाई बीच में छोड़ रेलवे अफसर क्रेन वापस ले गए। उसके बाद एडीए ने मकानों को जेसीबी से गिराने की कवायद शुरू की। हालांकि, खबर लिखे जाने तक कार्रवाई जारी रही।
सड़क चौड़ीकरण के चलते कुछ दिनों पहले एडीए ने हिम्मतगंज में जीटी रोड पर कार्रवाई करते हुए उसकी जद में आने वाले कई मकानों का आगे का हिस्सा तोड़ दिया था। इनमें ये चार मकान भी शामिल थे। गत बुधवार को नींव में पानी जाने के कारण ये चारों भवन सड़क की ओर झुक गए। प्रशासन ने इन्हें खतरनाक घोषित करते हुए ध्वस्त करने की तैयारी शुरू कर दी थी। तीन दिन की जद्दोजहद के रेलवे शनिवार को क्रेन भेजने पर राजी हुआ। शनिवार शाम रेलवे की करीब 80 फीट ऊंची क्रेन पहुंची। एनडीआरएफ और पुलिस ने मिलकर पूरे इलाके को खाली करा लिया। चौथे मकान में कार्रवाई से पहले भी लोग मौजूद थे, जिनको एनडीआरएफ टीम ने बाहर निकाला।
सबसे बड़ी चुनौती अगलबगल की इमारतों को सुरक्षित रखते हुए चारों भवन सुरक्षित तरीके से जमींदोज करने की थी। इन सबको देखते हुए इमारत पर हैंमबरिंग करने की योजना बनी। रात करीब साढ़े नौ बजे क्रेन से मकानों के दाईं ओर से हैंमबरिंग शुरू हुई। एक दर्जन हैंमबरिंग के बाद एक मकान की ऊपर की टंकी के अलावा मामूली हिस्सा ही तोड़ा जा सका। करीब तीन घंटे की कार्रवाई के बाद अचानक रेलवे अधिकारी दूसरी साइट पर काम शुरू कराने का हवाला देते हुए रात करीब साढ़े ग्यारह बजे क्रेन लेकर चले गए। उसके बाद एडीए के जेसीबी से नीचे से इमारत को गिराने की कोशिश हुई, लेकिन उसमें भी बहुत सफलता नहीं मिली। हालांकि, कार्रवाई देर-रात को भी जारी रही। इस दौरान एडीए के गुडाकेश शर्मा, आलोक पांडेय, सुशील चौबे, सीओ शिवराज, इंस्पेक्टर खुल्दाबाद रोशनलाल समेत कई थाने से पुलिस बल मौके पर डटा रहा।
शनिवार सुबह भी मकान जमींदोज करने की तैयारी शुरू न होते देख लोग भड़क गए। बिजली-पानी और रास्ता बंद होने से परेशान लोगों ने खुद ही दोनों ओर लगी बैरीकेडिंग उखाड़ फेंकी। इसको लेकर लोगों की पुलिसकर्मियों से नोंकझोंक भी हुई, लेकिन लोगों के गुस्से को देखते हुए पुलिस ने सब्र से काम लिया। लोग दोपहर को जमा हो गए और रास्ता खोलने की मांग करने लगे। बवाल बढ़ने की सूचना पर सीओ प्रथम शिवराज भी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंच गए। उनके शाम तक कार्रवाई शुरू होने का भरोसा दिलाने पर लोग किसी तरह शांत हुए।