जिले के सनसनीखेज हत्याकांडों में से एक मरियाडीह दोहरे हत्याकांड में प्रयुक्त फॉर्च्यूनर कार आखिरकार बरामद कर ली गई। महीनों की मशक्कत के बाद धूमनगंज पुलिस ने इसे कौशाम्बी में रहने वाले ठेकेदार के घर के बाहर से कब्जे में ले लिया। जांच में पता चला है कि हत्याकांड के एक नामजद आरोपी और वाहन मालिक अबू बकर ने इसे दो साल पहले ठेकेदार को बेच दिया था। पुलिस का कहना है कि ठेकेदार की तलाश की जा रही है। उससे पूछताछ की जाएगी।
25 सितंबर 2015 को धूमनगंज के मरियाडीह में तत्कालीन प्रधान आबिद की चचेरी बहन अल्कमा व उसके ड्राइवर सुरजीत को कार के भीतर गोलियों से भून दिया गया था। मामले में पहले कम्मो-जाबिर समेत अन्य को नामजद कराया गया। लेकिन बाद में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। पुलिस ने बताया कि हत्याकांड को अतीक अहमद व अशरफ के इशारे पर खुद आबिद व उसके गुर्गों ने अंजाम दिया। घटना में प्रयुक्त कार काफी कोशिशों केबाद भी बरामद नहीं हो सकी थी। पिछले दिनों पुलिस को सूचना मिली कि कार झूंसी निवासी अजय पांडेय के पास है, जो चोरी छिपे इसका प्रयोग कर रहा है।
पुलिस झूंसी पहुंची तो पता चला कि वह किराये का कमरा छोड़कर दो साल पहले गाजियाबाद चला गया है। गाजियाबाद पहुंचने पर पुलिस को अजय तो नहीं मिला लेकिन उसका मूल निवासी कौशाम्बी में होने की जानकारी हुई। पुलिस कौशाम्बी के कोखराज टिकरी स्थित अजय के घर पर पहुंची तो फॉर्च्यूनर घर के बाहर खड़ी मिली। जांच पड़ताल में पता चला कि अबूबकर नाम के व्यक्ति ने 2019 में उक्त कार अजय को बेची थी। पुलिस ने बताया कि अबूबकर दोहरे हत्याकांड का नामजद आरोपी है। धूमनगंज पुलिस ने बताया कि कार को कब्जे में ले लिया गया है। इसे खरीदने वाले अजय पांडेय से भी पूछताछ की जाएगी।
अतीक के इशारे पर हुई थी हत्याएं
अल्कमा-सुरजीत की हत्या अतीक अहमद के इशारे पर खुद उसके चचेरे भाई आबिद ने अपने गुर्गों संग मिलकर की थी। मामले में पहले आबिद की ओर से कम्मो-जाबिर समेत अन्य को नामजद कराया गया। बाद में पुनर्विेवेचना में खुलासा हुआ था कि यह ऑनर किलिंग थी, जिसमें अतीक ने अपने विरोधियों को फंसाने के लिए गलत नामजदगी कराई थी।