विमल ने आरोप लगाया कि इस दौरान एक और फर्जीवाड़ा सामने आया कि सभी आरोपियों के द्वारा केडीए की जमीन एक ऐसे हाईकोर्ट के आर्डर को दिखाकर बेची जा रही है जिसमें कहीं भी आराजी संख्या 48 का जिक्र न होकर सिर्फ प्लाट नंबर 247, 48 का जिक्र था। इन लोगों ने केडीए के अधिकारियों से साठगांठ कर एक ऐसा आरटीआई का पत्र प्राप्त किया था जिसमें लिखा था कि केडीए यह मुकदमा हार चुका है, लेकिन नीचे यह भी लिखा है कि जो मुकदमा केडीए हारा है उसका कोई जानकारी केडीए में उपलब्ध नहीं थी।
पूर्व विधायक इरफान सोलंकी के अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने दलील दी कि वादी जिस जमीन को अपना बताकर विधायक पर जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया है, वह जमीन वादी की है ही नहीं। वादी का जमीन के मूल मलिक के साथ सिविल मुकदमा चल रहा है। राजनीतिक रंजिश के चलते वादी ने इरफान सोलंकी पर झूठे मुकदमा दर्ज कराए हैं। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने इरफान सोलंकी पर चल रहे मुकदमे की पूरी कार्यवाही पर रोक लगा दी।