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UP : पूर्व विधायक इरफान सोलंकी को हाईकोर्ट से मिली राहत, रंगदारी के मुकदमे की कार्यवाही पर कोर्ट ने लगाई रोक

Mon, 13 Oct 2025 12:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कानपुर से सपा के पूर्व विधायक इरफान सोलंकी के खिलाफ चल रहे जमीन पर कब्जे और रंगदारी के मुकदमे की पूरी कार्यवाही पर रोक लगा दी है। कोर्ट में इरफान के अधिवक्ता ने दलील दी कि जिस जमीन के मामले में मकुदमा दर्ज किया गया है वह जमीन वादी के नाम है ही नहीं। 
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इरफान सोलंकी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर के सीसामऊ से सपा के विधायक रहे इरफान सोलंकी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने रंगदारी और जमीन पर कब्जा करने के मामले में ट्रायल कोर्ट में चल रहे मुकदमे की कार्यवाही पर अगले आदेश तक रोक लगा दी है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति समीर जैन की एकल पीठ कर रही है।

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कानपुर के जाजमऊ थाना क्षेत्र के दुर्गा विहार निवासी विमल कुमार ने 25 दिसंबर 2022 को पूर्व विधायक इरफान सोलंकी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। सोलंकी के साथ ही बिल्डर हाजी वसी, शाहिद लारी और कमर आलम के खिलाफ भी मारपीट, रंगदारी, धमकी समेत सार्वजनिक संपति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। 

वादी ने आरोप लगाया था कि उसकी जाजमऊ स्थित आराजी संख्या 963 जिसका रकबा एक हजार वर्ग मीटर जमीन था। विधायक इरफान सोलंकी, हाजी वसी, कमर आलम और शाहिद लारी ने जबरन उसकी जमीन पर कब्जा कर लिया था। डीएम से शिकायत पर लेखपाल ने जाकर जांच की और पुलिस के द्वारा कार्रवाई करके जमीन कब्जा मुक्त कराने की बात भी लिखी थी। आरोप है कि जब इन लोगों ने उसकी जमीन पर कब्जा किया था तो दर्शाया कि आराजी संख्या 48 की जमीन का हिस्सा है। वादी ने आराजी संख्या 48 के संबंध में जानकारी की गई तो पता चला कि यह जमीन कानपुर डेवलपमेंट अथॉरिटी के नाम है जिसका पूरा रकबा 77 सौ वर्ग मीटर का है।

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विमल ने आरोप लगाया कि इस दौरान एक और फर्जीवाड़ा सामने आया कि सभी आरोपियों के द्वारा केडीए की जमीन एक ऐसे हाईकोर्ट के आर्डर को दिखाकर बेची जा रही है जिसमें कहीं भी आराजी संख्या 48 का जिक्र न होकर सिर्फ प्लाट नंबर 247, 48 का जिक्र था। इन लोगों ने केडीए के अधिकारियों से साठगांठ कर एक ऐसा आरटीआई का पत्र प्राप्त किया था जिसमें लिखा था कि केडीए यह मुकदमा हार चुका है, लेकिन नीचे यह भी लिखा है कि जो मुकदमा केडीए हारा है उसका कोई जानकारी केडीए में उपलब्ध नहीं थी। 

पूर्व विधायक इरफान सोलंकी के अधिवक्ता उपेंद्र उपाध्याय ने दलील दी कि वादी जिस जमीन को अपना बताकर विधायक पर जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया है, वह जमीन वादी की है ही नहीं। वादी का जमीन के मूल मलिक के साथ सिविल मुकदमा चल रहा है। राजनीतिक रंजिश के चलते वादी ने इरफान सोलंकी पर झूठे मुकदमा दर्ज कराए हैं। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने इरफान सोलंकी पर चल रहे मुकदमे की पूरी कार्यवाही पर रोक लगा दी। 
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