योगी सत्यम से चर्चा करते पूर्व सीजेआई तीरथ सिंह ठाकुर।
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महाकुंभ में पहुंचे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर ने महाअवतार वटवृक्ष के नीचे तीन घंटे से अधिक समय तक सनातन की संस्कृति और समन्वय की ताकत पर विस्तार से चर्चा की। विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजन के रूप में संगम पर बसे महाकुंभ में पत्नी अमिता ठाकुर और पुत्र समेत क्रियायोग आश्रम में पहुंचे पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने महाअवतार बाबा के कुंभ आगमन से लेकर उनके अमरता और सर्व व्यापकता के दर्शन को समझने का प्रयास किया। उनका कहना था कि महाकुंभ भारत की िवराट सांस्कृतिक संपदा से विश्व समुदाय को जोड़ने का सबसे बड़ा माध्यम है।
शाम छह बजे आश्रम परिसर पहुंचे न्यायमूर्ति तीरथ सिंह ठाकुर का क्रियायोग आश्रम एवं अनुसंधान संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी योगी सत्यम ने वट वृक्ष के नीचे तिलक लगाकर स्वागत किया। वह से वह क्रियायोग मंदिर का दर्शन करने पहुंचे। क्रियायोग के मंदिर को उन्होंने अद्भुत बताया। पूछा कि इस अद्भुत मंदिर की संरचना कब और कैसे हो सकी, इस पर स्वामी योगी सत्यम ने बताया कि 1894 के महाकुंभ में महाअवतार बाबा ने इसी वटवृक्हीष के नीचे युक्तेश्वर गिरि को क्रियायोग की दीक्षा दी और उन्हें स्वामी की उपाधि दी।
इसी के बाद षड्चक्र पर आधारित सात चक्रों का यह विश्व का अनूठा मंदिर उनके शिष्यों ने बनाया। इसमें मूलाधार चक्र, स्वधिष्ठान, मिणपुर, अनाहद, विशुद्धि, आज्ञा और सहस्त्रार चक्र की साधना से गुजरने के बाद यहां अष्ट सिद्धि, नौ निधियों का प्राकट्य होता है। क्रियायोग से सभी प्रकार की शारीरिक, मानसिक बीमारियों के ठीक होने के वैज्ञानिक कारणों की भी उन्होंने जानकारी ली। इसके बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने अमेरिका, कनाडा, सिंगापुर, वियना, ब्राजील, आस्ट्रेलिया, इटली से आए पांच सौ से अधिक साधकों से भी मुलाकात की। इस दौैरान विदेशी साधकों का कहना था कि वह चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी सरकार उनको दीर्घकालिक वीजा प्रदान करे, ताकि क्रियायोग आश्रम में रहकर वह अपनी जीवन निरोगी और खुशहाल बना सकें।