उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से 21 अप्रैल से शुरू होने वाले प्रधानाचार्य के साक्षात्कार में एक पूर्व सदस्य मनोज कुमार यादव भी अयोग्य घोषित कर दिए गए हैं। चयन की अर्हता पूरी नहीं करने के कारण नहीं बल्कि मनोज कुमार को इंटरव्यू के लिए नहीं बुलाया गया है। प्रधानाचार्य के पद की अर्हता पूरी नहीं करने वाले पूर्व माननीय सदस्य एक बार फिर से चयन बोर्ड में खाली हुए सदस्य के पद की दावेदारी कर रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि वह अपने खाली किए गए पद पर दोबारा पदस्थापित होने जा रहे हैं।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से चार फरवरी को अवकाश ग्रहण करने वाले सदस्य मनोज कुमार यादव स्वयं प्रधानाचार्य के पद के अभ्यर्थी हैं। चयन बोर्ड में उनकी तैनाती के दौरान तैयार इंटरव्यू लिस्ट में उन्हें भी शामिल नहीं किया गया है। चयन बोर्ड की ओर से तैयार सूची में मनोज कुमार को निर्धारित अर्हता पूरी नहीं करने के कारण बुलावा नहीं भेजा गया है। ऐसे में मनोज कुमार की ओर से पूर्व में लिए गए साक्षात्कार भी सवालों के घेरे में हैं।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के सदस्य रह चुके मनोज कुमार ने प्रधानाचार्य के पद के लिए यह आवेदन 2011 में किया था। आखिर ऐसा हो भी क्यों नहीं माननीय सदस्य चयन बोर्ड में भले ही प्रधानाचार्य के पद का साक्षात्कार ले चुके हों, चयन बोर्ड में अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद अपने विद्यालय में फिर से प्रवक्ता के पद पर लौट चुके हैं। लखनऊ के एक इंटरमीडिएट कॉलेज में प्रवक्ता और चयन बोर्ड के पूर्व चर्चित सदस्य ने प्रधानाचार्य पद के लिए आवेदन किया है और बतौर सदस्य इसी विज्ञापन में साक्षात्कार भी ले चुके हैं। वह लखनऊ के जिस विद्यालय में प्रवक्ता हैं, वहीं के लिए प्रधानाचार्य पद के अभ्यर्थी हैं। इस बारे में चयन बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि पूर्व सदस्य ने प्रधानाचार्य के पद के लिए आवेदन 2011 में किया होगा जबकि चयन बोर्ड में सदस्य वह फरवरी 2012 में बने हैं। अब शैक्षिक अर्हता और अनुभव की कमी के कारण उन्हें साक्षात्कार में शामिल नहीं किया गया है।