फोरेंसिक जांच से खुलेगा महंत की मौत का राज
जांच के लिए लखनऊ स्थित लैब में भेजी जाएगी पिस्टल
दारागंज स्थित आश्रम में मृत मिले थे निरंजनी अखाड़े के सचिव
प्रयागराज। दारागंज स्थित पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के आश्रम में सचिव आशीष गिरि की संदिग्ध हाल में हुई मौत का राज फोरेंसिक जांच से खुलेगा। इसके लिए मौके से बरामद पिस्टल को लखनऊ स्थित फोरेंसिक लैब में भेजा जाएगा। उधर, मौके से मिले महंत के दो मोबाइल फोन की कॉल डिटेल भी निकलवाई जा रही है।
सचिव आशीष गिरि की एक दिन पहले आश्रम के पहली मंजिल पर बने कमरे में संदिग्ध हालत में गोली लगने से मौत हो गई थी। सूचना पर पहुंची पुलिस को मौके से पिस्टल के साथ ही कारतूस, खोखे व अन्य सामान मिले थे। पुलिस व अखाड़ा परिषद अध्यक्ष नरेंद्र गिरि का कहना था कि महंत ने खुद को गोली मारकर खुदकुशी की। हालांकि, घटनास्थल के हालात ने मामले को उलझा दिया था। दरअसल, यहां पुलिस को दो खोखे मिले जबकि, महंत की कनपटी पर ही गोली लगी थी। इसके अलावा कई अन्य बातों से भी खुदकुशी की थ्योरी पर सवाल खड़े हुए। इस मामले में दारागंज पुलिस का कहना है कि अब तक किसी तरह की कोई शिकायत उसे नहीं मिली है। हालांकि, जांच-पड़ताल की जा रही है। मौके से मिली पिस्टल व अन्य सामान फोरेंसिक जांच के लिए जल्द ही लखनऊ भेजे जाएंगे। फोरेंसिक जांच में साफ हो जाएगा कि घटना खुदकुशी है या नहीं।
लॉक है मोबाइल, निकलवाई जा रही सीडीआर
उधर, मौके से पुलिस को दो मोबाइल फोन भी बरामद हुए थे। हालांकि दोनों में ही लॉक लगा होने के कारण इसकी छानबीन दूसरे दिन भी नहीं की जा सकी। दारागंज पुलिस का कहना है कि दोनों मोबाइल में लगे नंबरों की कॉल डिटेल रिपोर्ट निकलवाई जा रही है। सीडीआर सामने आने के बाद भी कई चीजें साफ हो जाएंगी। दरअसल, घटना की सूचना पर पहुंचे अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने पुलिस अफसरोें को बताया था कि सुबह उनकी महंत से फोन पर बात हुई थी। जिसमें उन्होेंने कुछ देर बाद मठ पहुंचने की बात कही थी और तब वह बातचीत में बेहद सामान्य दिख रहे थे। ऐसे में यह भी हो सकता है कि अध्यक्ष के बाद किसी अन्य व्यक्ति से महंत की फोन पर बात हुई हो, जिसके बाद यह घटना हुई हो।
तीन शस्त्र लाइसेंस थे महंत के पास
उधर पुलिस सूत्रों ने बताया कि मृत महंत आशीष गिरि के पास तीन शस्त्र लाइसेंस थे। इनमें से दो 2015 में बनवाए गए थे। जबकि एक इसी साल मार्च में जारी कराया गया था। दारागंज पुलिस की संस्तुति के बाद ही यह लाइसेंस निर्गत हुआ था। जिसके सीमा विस्तार के लिए इन दिनों महंत प्रयासरत थे।
आश्रम में पसरा रहा सन्नाटा
उधर घटना के दूसरे दिन दारागंज के मोरी रोड स्थित पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के आश्रम में सन्नाटा पसरा रहा। कुल साधु-संत मिले भी तो उन्होंने घटना के बाबत कोई भी बात करने से इंकार किया। उधर आश्रम के आसपास रहने वाले लोगों का कहना था कि महंत के व्यवहार से कभी ऐसा नहीं लगा कि वह किसी बात को लेकर तनाव या परेशानी में हैं। मिलने पर हर व्यक्ति का वह हंसकर ही जवाब देते थे।
क्या किसी से जान का खतरा था?
उधर शस्त्र लाइसेंस सीमा विस्तार के संबंध में दिए गए आवेदन को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं हैं। जिनमें से एक यह है कि क्या महंत आशीष गिरि को किसी से जान का खतरा था? दरअसल शस्त्र लाइसेंस जारी होने के आठ महीने बाद ही उन्होंने इसके सीमा विस्तार के लिए अर्जी दे दी थी। साथ ही इसके लिए लगातार पैरवी भी की जा रही थी। ऐसे में सवाल था कि आखिर किस खतरे के मद्देनजर वह प्रदेश से बाहर जाने की दशा में भी शस्त्र अपने साथ रखने की अनुमति चाहते थे।