सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका
दाखिल करना देशद्रोह के समान
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के निर्णय से अखाड़ा परिषद खफा
ओवैसी व मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड की गतिविधियों की जांच हो : नरेंद्र गिरि
प्रयागराज। राम जन्मभूमि पर हुए फैसले को ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के बयान की अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने दो टूक कहा कि ऐसा करने वाले देशद्रोही हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट का फैसला देश के अधिकतर मुसलमानों ने मान लिया है। अब इस मामले में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड को अड़ंगा नहीं डालना चाहिए।
उन्होंने एआईएमआईएम के नेता व सांसद असदुद्दीन ओवैसी की भी कड़ी आलोचना की। कहा, वह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के एजेंट के तौर पर काम कर रहे हैं। ओवैसी और मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड से जुड़े लोगों की गतिविधियों की जांच की जानी चाहिए। इसमें यह बात सामने आ जाएगी कि यह लोग ऐसा किसकेइशारे पर कर रहे हैं। देशभक्त मुसलमानों का संविधान और न्यायपालिका में पूरा विश्वास है। लेकिन जिन लोगों को संविधान और न्यायपालिका में विश्वास नहीं है, वही लोग फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने की बात कह रहे हैं।
महंत नरेंद्र गिरि ने पक्षकार इकबाल अंसारी और सुन्नी वक्फ बोर्ड चेयरमैन फारूकी के बयान का स्वागत किया, जिसमें उन दोनों ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के निर्णय से असहमति जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि अयोध्या विवाद पर ऐतिहासिक फैसले के बाद देश में अमन और शांति बनी हुई है। देश में अगर कोई बवाल होता है तो इसकी सारी जिम्मेदारी ओवैसी और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की होगी। असदुद्दीन ओवैसी की कोई साजिश अब कामयाब नहीं होगी।