शक्तिधाम शिविर में सनातन धर्म की दीक्षा लेते विदेशी श्रद्धालु।
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आयरलैंड में विक्री और विपणन के क्षेत्र में काम करने वाले डेविड हैरिंगटन का कहना है सनातन की सरलता ने उन्हें सात समुंदर पार भारत की तरफ खींच लाई, वो कहते सनातन एक ऐसी अकेली जीवन पद्धति है जो आप पर कुछ थोपती नहीं हैं इसकी सहजता और सरलता मुझे शुरू से ही सम्मोहित करती थी। महाकुंभ के अद्भुत और पावन अवसर पर मैंने सनातन को स्वीकार किया है जो मुझे असीम शांति और आनंद का अनुभव करा रहा है।
फ्रांस में सॉफ्टवेयर इंजीनियर का काम करने वाले ओलिवियर गिउलिरी कहते है कि जीवन में सब कुछ होने के बाद भी एक अधूरापन था, मैं अपने आप को तलाश रही था और वह तलाश सनातन में आकर समाप्त हुई। जगद्गुरु साईं मां के सानिध्य में मेरे जीवन को एक नई दिशा मिली और आज उनसे गुरु दीक्षा लेकर इसको अंगीकार किया है, इसके लिए महाकुंभ से बड़ा अवसर मेरे जीवन में शायद ही कभी आ सकता था मैं गुरु दीक्षा लेकर अभीभूत हूं।
दीक्षा लेने वालों में संयुक्त राज्य अमेरिका में वास्तुकार मैथ्यू लॉरेंस, कनाडा में चिकित्सक
आंद्रे अनात, संयुक्त राज्य अमेरिका में ऊर्जा के क्षेत्र में काम करने वाले जेनी मिलर, कनाडा में आईटी डेवलपर मैथ्यू सावोई, बेल्जियम में स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सलाहकार क्रिस्टेल डी कैट भी शामिल रहे। जगद्गुरु सांई मां लक्ष्मी देवी के सानिध्य में अभी तक शक्ति धाम के शिविर में इस पावन महाकुंभ के दौरान 200 से अधिक विदेशियों ने सनातन की दीक्षा प्राप्त की है।
गौरतलब है कि मॉरीशस के एक ब्राम्हण परिवार में जन्मी जगद्गुरु साई मां हिंदू धर्म के प्रचार प्रसार में पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय हैं। वर्ष 2019 में साई मां से प्रेरित होकर नौ विदेशी मूल के शिष्यों ने संत परंपरा को आत्मसात करते हुए हिंदू धर्म को अंगीकार किया था और उन सभी को महामंडलेश्वर की उपाधि प्राप्त की थी जिनमें तीन महिला संत भी शामिल हैं। साई मां के भक्तों में दुनिया भर के 12 देशों से अधिक के निवासी हैं जो अब हिंदू धर्म स्वीकार कर चुके हैं। जापान,अमेरिका, इजरायल , फ़्रांस समेत कई अन्य यूरोपीय देशों में इनके भक्तों की भारी संख्या है।