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अन्न, जल त्याग कर विश्व कल्याण के लिए संगम की रेती पर अग्नि के घेरे में पंच अग्नि तपस्या (देखें तस्वीरें)

Fri, 19 Feb 2021 01:11 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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prayagraj news : संगम की रेती पर पंच अग्नि तपस्या कर रहे संन्यासी। - फोटो : prayagraj
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संगम की रेती मंगलवार को ऋतुराज वसंत के आगमन के साथ महात्यागी संतों की निराली तपस्या की साक्षी बनी। इसका केंद्र बना खाक चौक में बसा तपस्वी नगर। तपस्वी नगर केशिविरों में त्यागी परंपरा के संतों ने पंच अग्नि तपस्या आरंभ की। अग्नि के घेरे में अन्न-जल का परित्याग तक लोक कल्याण के लिए संत माघी पूर्णिमा तक सूर्योदय से सूर्यास्त तक तप करेंगे। जेष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की दशमी यानी गंगा दशहरा पर इस तपस्या की पूर्णाहुति होगी।

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prayagraj news : संगम की रेती पर पंच अग्नि तपस्या कर रहे संन्यासी। - फोटो : prayagraj
महावीर पांटून पुल पार होने के बाद खाक चौक के तपस्वीनगर में दो सौ से अधिक संतों ने अग्नि तपस्या आरंभ की। समूहों में एक साथ कई संत अग्नि के घेरे में सिर पर घड़ा रखकर ध्यान मग्न नजर आए। वसंत पंचमी पर संगम में पुण्य की डुबकी लगाने के बाद सर्व मंगल और लोक कल्याण की कामना से तपस्वी संतों ने पंच अग्नि साधना आरंभ की है।

prayagraj news : संगम की रेती पर पंच अग्नि तपस्या कर रहे संन्यासी। - फोटो : prayagraj
इस तरह छह प्रकार की अग्नि साधना तपस्वीनगर में माघी पूर्णिमा तक चलेगी। युवा तपस्वी संत गोपाल दास बताते हैं कि संगम पर माघ मेले में आने वाले संतों ने पूरे जीव जगत के कल्याण के लिए पंच अग्नि तप का संकल्प लिया है। इस तपस्या के दौरान सुबह से शाम तक संत नियमित साधना करेंगे।
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prayagraj news : संगम की रेती पर पंच अग्नि तपस्या कर रहे संन्यासी। - फोटो : prayagraj
गंगा दशहरा पर हवन- पूजन कर धुनी को गंगा में विसर्जित किया जाएगा। तपस्या किसी कारण से अगर भंग हो जाती है तो अगले वर्ष नए सिरे से संकल्प से उसे आरंभ करना होता है। तपस्वीनगर में इस बार चौरासी अग्नि, द्वादश अग्नि, कोटि अग्नि और कोटि खप्पर अग्नि की भी साधना की जा रही है।
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