Prayagraj News : महिला फुटबॉल खिलाड़ी ग्राउंड पर अभ्यास करती हुईं।
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कोरोना के बाद कुछ कम हुई है महिला फुटबॉलरों की संख्या
डिस्ट्रिक्ट फुटबॉल एसोसिएशन के सचिव मकबूल अहमद कहते हैं कि फुटबॉल के गुर सीखने के लिए लड़कियां प्रतिदिन कड़ी मेहनत करती हैं। कोरोना से पहले मैदान पर 30-35 लड़कियां हर रोज प्रैक्टिस के लिए आया करती थीं, लेकिन कोरोना के बाद से इनकी संख्या घटी है। इस समय मैदान में 10-12 लड़कियां ही हर रोज प्रैक्टिस कर रही हैं। वह बताते हैं कि इस मैदान में अभ्यास कर कई लड़कियों ने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय टूर्नामेंट में हिस्सा लेकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
लड़कियों को उनकी सीनियर खिलाड़ी निशा कुमारी नि:शुल्क प्रशिक्षण देती हैं। निशा इस मैदान पर वर्ष 2005 से फुटबॉल खेल रही हैं। सलोरी की रहने वाली निशा के घर से मैदान काफी दूरी पर है लेकिन वह पिछले 17 सालों से बराबर इस मैदान पर लड़कियों को फुटबाल सिखाने आ रही हैं। निशा ने इसी मैदान से फुटबॉल सीखकर लगातार सात बार नेशनल टीम में अपनी जगह बनायी है। वर्ष 2014 में उन्हें इसी स्पोर्ट्स कोटे से प्रतापगढ़ में नौकरी भी लगी थी, लेकिन 2018 में उन्होंने अपनी ट्रेनिंग के चलते नौकरी छोड़ दी।
कई महिला खिलाड़ियों को स्पोर्ट्स कोटे से मिल चुकी है नौकरी
अब वह मैदान पर अपनी जूनियर खिलाड़ियों को फुटबॉल के गुर सिखा रही हैं और इंतजार में हैं कि स्पोर्ट्स कोटे से उन्हें फिर नौकरी मिले। इसी मैदान पर फुटबॉल सीखकर लगातार चार बार नेशनल टीम में जगह बनाने वाली कंचन सोनकर भी स्पोर्ट्स कोटे से कानपुर मेट्रो में नौकरी कर रही हैं। इस मैदान से फुटबॉल खेलकर स्पोर्ट्स कोटे से 8-10 लड़कियां एजी व रेलवे जैसे संस्थानों में अपनी सेवा दे रही हैं।
लड़कों व लड़कियों को प्रशिक्षण देने वाले कोच अनिल सोनकर बताते हैं कि प्रदेश में फुटबॉल के खेल में प्रयागराज की लड़कियों ने झंडा गाड़ रखा है। जिले की महिला फुटबॉल टीम ने अलग अलग आयु वर्ग की प्रतियोगिता में कई खिताब अपने नाम किए हैं। जिले की लड़कियों ने वर्ष 2007 से 2015 तक लगातार स्टेट टूर्नामेंट में जीत हासिल की है, जबकि हर साल जिले से 7-8 लड़कियां नेशनल खेलती हैं, यह एक बड़ी उपलब्धि है।