कोरोना संक्रमण के बीच देशव्यापी लॉकडाउन में देश भर से आ रहे मजदूरों को जिन क्वारंटीन सेंटरों में रखा जा रहा है, वहां बदइंतजामी का बोलबाला है। शहर के बीच केपी कम्युनिटी के रंजीत सिंह स्पोर्ट्स स्टेडियम के क्वारंटीन सेंटर में शनिवार को 25 मजदूरों को खाना नहीं मिला। क्वारंटीन किए गए मजदूरों की शिकायत है कि चाय तो कभी दी ही नहीं जाती। तीन दिन पहले कम भोजन मिलने पर इस केंद्र में रखे गए मजदूरों ने हंगामा भी मचाया था। इस क्वारंटीन सेंटर में यूपी, बिहार के 139 मजदूरों को रखा गया है।
शनिवार की दोपहर इस केंद्र पर 120 पैकेट खाना भिजवाया गया। कम खाना आने की वजह से जब केंद्र प्रभारी सुरेंद्र ने वितरण में देरी की तो मजदूरों ने भूख लगने की शिकायत शुरू कर दी। दीपक कुमार, सेवक लाल, विक्रम कुमार समेत कई मजदूरों का कहना था कि जितना खाना है, वह वितरित करा दिया जाए। इसके बाद खाना बंटवाया गया, लेकिन 25 मजदूरों को खाने के पैकेट नहीं मिल सके। सहरसा बिहार के पिपरा बेगवा गांव निवासी पिंटू, सुरेश कुमार ने बताया कि खाना कम भेजा जा रहा है।
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पेट भर भोजन नहीं मिल पा रहा है। शनिवार को खाना कम आने पर जिन मजदूरों को पैकेट नहीं मिले, उन्हें बजार से केला मंगा कर खाना पड़ा। मुंबई के जलगांव में मजदूरी करने वाले कोरांव के जगदीश प्रसाद और रामराज भी इसी केंद्र पर क्वारंटीन किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कभी छोला, चावल और कभी दाल-चावल और पूड़ी-सब्जी दिया जा रहा है, लेकिन पेट नहीं भरता। इसकी शिकायत उन्होंने केंद्र प्रभारी और वहां आने वाले अन्य अधिकारियों से भी की, लेकिन स्थिति में सुधार नहीं हो सका है।
क्वारंटीन किए गए मजदूरों की संख्या अचानक बढ़ गई है। 118-120 पैकेट भोजन सुबह आता है, लेकिन इस दिन मजदूरों की तादाद अधिक होने से सबको खाने के पैकेट नहीं दिए जा सके। शाम को खाना आने पर भरपाई करा दी जाएगी। सुरेंद्र कुमार, क्वारंटीन सेंटर प्रभारी।
क्वारंटीन सेंटरों पर रहने से इंकार, सुविधाओं का अभाव होने से सांसत
रंजीत सिंह स्पोर्ट्स स्टेडियम के क्वारंटीन सेंटर पर अव्यवस्था का बोलबाला है। इस केंद्र पर क्वारंटीन किए गए लोगों को बेड तक मयस्सर नहीं है। जमीन पर ही उनको रखा गया है। शिकायत के बाद भी चादरें नहीं दी गईं। मच्छरों के काटने और गंदगी होने की वजह से दूसरी बीमारियां फैलने का भी खतरा है। मुबई में आटो रिक्शा चलाने वाले मांडा के दीपक कुमार यादव को भी इसी केंद्र में क्वारंटीन किया गया है। उन्होंने बताया कि यहां सुविधाओं का अभाव होने से कोई रहना नहीं चाहता। न साबुन है न सैनिटाइजर। सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरी तरह अभाव है। शिकायत करने पर सुनी नहीं जाती।